Lucknow, India

'हिंदू पत्नी का मंगलसूत्र हटाना पति के प्रति मानसिक क्रूरता', मद्रास हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

Published 2 June 2026 · india

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने वैवाहिक संबंधों और हिंदू रीति-रिवाजों को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि एक हिंदू पत्नी द्वारा अपनी मंगलसूत्र को स्वेच्छा से हटाना, पति के प्रति 'मानसिक क्रूरता' की

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने वैवाहिक संबंधों और हिंदू रीति-रिवाजों को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि एक हिंदू पत्नी द्वारा अपनी मंगलसूत्र को स्वेच्छा से हटाना, पति के प्रति 'मानसिक क्रूरता' की श्रेणी में आता है। इस टिप्पणी के साथ ही अदालत ने 30 साल से अधिक समय से अलग रह रहे एक बुजुर्ग दंपति के मामले में पति को दिए गए तलाक के फैसले को कानूनी रूप से बरकरार रखा है।

जस्टिस पी. वड़ामलई की पीठ ने यह ऐतिहासिक फैसला पत्नी द्वारा दायर की गई उस अपील को खारिज करते हुए दिया, जिसमें उसने निचली अदालत द्वारा पति के पक्ष में दिए गए तलाक के आदेश को चुनौती दी थी। क्या है पूरा मामला? 30 साल से अलगाव: इस मामले में शामिल दंपति पिछले तीन दशकों (30 वर्ष से अधिक समय) से एक-दूसरे से पूरी तरह अलग रह रहे थे। इस मामले में शामिल दंपति पिछले तीन दशकों (30 वर्ष से अधिक समय) से एक-दूसरे से पूरी तरह अलग रह रहे थे।

निचली अदालत का फैसला: पति की याचिका पर सुनवाई करते हुए स्थानीय पारिवारिक अदालत ने पहले ही क्रूरता और अलगाव के आधार पर विवाह विच्छेद (तलाक) को मंजूरी दे दी थी। पति की याचिका पर सुनवाई करते हुए स्थानीय पारिवारिक अदालत ने पहले ही क्रूरता और अलगाव के आधार पर विवाह विच्छेद (तलाक) को मंजूरी दे दी थी। हाईकोर्ट में अपील: पत्नी ने इस फैसले को स्वीकार नहीं किया और निचली अदालत के आदेश को रद कराने के लिए मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ का दरवाजा खटखटाया था।

सुनवाई के दौरान जस्टिस पी. वड़ामलई की पीठ ने हिंदू विवाह अधिनियम और स्थापित परंपराओं का हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि एक विवाहित हिंदू महिला के जीवन में 'थाली' या मंगलसूत्र का बहुत गहरा धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व होता है। इसे वैवाहिक बंधन के अटूट प्रतीक के रूप में देखा जाता है।

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