'छात्रों को ग्रेस मार्क्स देकर पास करें', OSM गड़बड़ियों पर संसदीय समिति ने दिया सुझाव; CBSE को लगाई फटकार
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। मूल्यांकन से जुड़ी गड़बड़ियों पर वैसे तो संसदीय समिति से जुड़े सदस्यों को सीबीएसई से सवाल करने थे, जो सदस्यों ने किए भी लेकिन समिति के सामने पेश हुए बारहवीं के छात्र सार्थक ने ओएसएम से जुड़ी गड़बड़ियों को लेकर जिस तरह के सवाल खड़े किए
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। मूल्यांकन से जुड़ी गड़बड़ियों पर वैसे तो संसदीय समिति से जुड़े सदस्यों को सीबीएसई से सवाल करने थे, जो सदस्यों ने किए भी लेकिन समिति के सामने पेश हुए बारहवीं के छात्र सार्थक ने ओएसएम से जुड़ी गड़बड़ियों को लेकर जिस तरह के सवाल खड़े किए, उससे समिति के मौजूद सदस्य दंग रह गए। समिति के सदस्यों ने न सिर्फ मेज थपथपाई बल्कि सीबीएसई के अधिकारियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि कुछ इससे सीखो। वहीं सार्थक से सवालों से सीबीएसई पूरी तरह से निरुत्तर दिखी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की अगुवाई वाली शिक्षा मंत्रालय से जुड़ी संसदीय समिति ने बारहवीं के छात्र सार्थक को बुलाया था।
सार्थक भी इस बैठक के लिए पूरी तैयारी के साथ आए थे। उन्होंने इस दौरान एक विस्तृत प्रजेंटेशन दिया। साथ ही कहा कि मूल्यांकन के लिए अपनाई गई ओएसएम से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, न ही इस प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी है। गड़बड़ी यह हुई कि इसकी काम जिस कंपनी को दिया गया, उसकी कोई जांच नहीं की गई है। उसके पास पूर्व में ओएसएम का कोई अनुभव भी नहीं है। सूत्रों की मानें तो सार्थक ने बताया कि कोएम्प्ट एडुकेट को टेंडर देने में किस तरह से ब्लैक लिस्टिंग के नियमों में बदलाव किया गया। खराब प्रदर्शन के क्लॉज को हटाया गया। वित्तीय पात्रता व दूसरे नियमों में ढील दी गई।
छात्रों को ग्रेस मार्क्स देने या जल्दी पुनर्मूल्यांकन कराएः समिति मूल्यांकन से जुड़ी गड़बड़ियों पर संसदीय समिति के सामने पेश हुए सीबीएसई अधिकारियों ने इस दौरान जहां गड़बड़ियों को दुरूस्त किए जाने का दावा दिया, वहीं पुनर्मूल्यांकन को शुरू होने की जानकारी दी। खबरें और भी समिति के सदस्य हालांकि उनके जवाब से संतुष्ट नहीं थे और छात्रों के हितों का ध्यान रखते हुए नुकसान का भरपाई के लिए उन्हें ग्रेस मार्क्स देने या फिर पुनर्मूल्यांकन के काम को तेजी से कराने का सुझाव दिया। समिति का कहना है कि इससे छात्रों को नुकसान होने से बचाया जा सकेगा। समिति ने इस दौरान सीबीएसई से ओएसएम को बगैर ट्रायल और ट्रेनिंग के शुरू किए जाने पर सवाल किए और पूछा कि ऐसी क्या जल्द ही थी, उसे टेंडर देने के डेढ़ महीने में भी लागू भी कर दिया।
इसे लेकर पहले ट्रायल क्यों नहीं किया गया। सूत्रों के मुताबिक सीबीएसई अधिकारियों ने इस दौरान अधिकांश सवालों पर कोई जवाब नहीं दिया। सिर्फ वह सवालों को सुनते और नोट करते दिखे। टेंडर प्रक्रिया से की गई छेड़छाड़ पर भी सवाल किए गए। इस पर सीबीएसई ने लिखित में जवाब देने का आश्वासन दिया।
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