Lucknow, India

West Bengal: SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग, कांग्रेस नेता ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की जनहित याचिका

Published 1 June 2026 · india

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक नई जनहित याचिका दायर की गई है। यह याचिका कांग्रेस नेता प्रसेनजीत बोस ने दाखिल की है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के देशव्यापी एसआईआर अभियान को वैध ठहराया था। हालांकि

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक नई जनहित याचिका दायर की गई है। यह याचिका कांग्रेस नेता प्रसेनजीत बोस ने दाखिल की है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के देशव्यापी एसआईआर अभियान को वैध ठहराया था। हालांकि नई याचिका में एसआईआर प्रक्रिया को चुनौती नहीं दी गई है। इसमें केवल इसकी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने चुनाव आयोग से फॉर्म-6 और फॉर्म-7 से जुड़े आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग की है। इनमें प्राप्त, स्वीकृत और अस्वीकृत आवेदनों का विधानसभा क्षेत्रवार विवरण शामिल है।

याचिका में यह भी मांग की गई है कि अपीलीय न्यायाधिकरणों के लिए बनाई गई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) सार्वजनिक की जाए। साथ ही मतदाताओं के लिए बांग्ला, हिंदी और अंग्रेजी में सरल दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी याचिका के अनुसार, पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान 58 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से बाहर हो गए थे। इसके बाद 9.64 लाख नए नाम जोड़ने और 99,118 नाम हटाने के आवेदन प्राप्त हुए। हालांकि 28 फरवरी 2026 को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में केवल 1.82 लाख नए नाम जोड़े गए।

याचिकाकर्ता का कहना है कि इससे प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं। प्रक्रिया को लेकर सही जानकारी उपलब्ध नहीं याचिका में कहा गया है कि अपील की प्रक्रिया, दस्तावेजों की जरूरत, सुनवाई और समय-सीमा को लेकर स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। इससे मतदाताओं में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि गरीब, ग्रामीण और वंचित वर्ग के मतदाताओं को अपील करने में सबसे अधिक कठिनाई हो रही है। स्पष्ट दिशा-निर्देश और कानूनी सहायता की कमी उनकी समस्या बढ़ा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर को सही ठहराया इससे पहले मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने एसआईआर प्रक्रिया को सही ठहराया था।

अदालत ने कहा था कि चुनाव आयोग को संविधान और कानून के तहत यह अधिकार प्राप्त है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि चुनाव आयोग नागरिकता से जुड़े मामलों की सीमित जांच कर सकता है। लेकिन किसी व्यक्ति की नागरिकता पर अंतिम फैसला केवल संबंधित सक्षम प्राधिकारी ही करेगा। याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा एसआईआर को वैध ठहराने के बावजूद इसके क्रियान्वयन में कई प्रक्रियागत कमियां बनी हुई हैं। इसलिए मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए न्यायालय के हस्तक्षेप की आवश्यकता है।

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