गुजरात सरकार का बड़ा फैसला: सरकारी सेवाओं के लिए अब अलग-अलग शपथ पत्र की जरूरत नहीं, नागरिकों को राहत
एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में नागरिक सेवाओं को सरल और सुगम बनाने के प्रयासों के तहत राज्य के विधि विभाग ने यह फैसला लिया है। विज्ञप्ति में कहा गया, अब तक नागरिकों को विभिन्न सरकारी विभागों की योजनाओं और सेवाओं का लाभ लेने के
एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में नागरिक सेवाओं को सरल और सुगम बनाने के प्रयासों के तहत राज्य के विधि विभाग ने यह फैसला लिया है। विज्ञप्ति में कहा गया, अब तक नागरिकों को विभिन्न सरकारी विभागों की योजनाओं और सेवाओं का लाभ लेने के लिए अलग-अलग प्रकार के शपथ पत्र जमा करने पड़ते थे। इससे लोगों को असुविधा, देरी और प्रक्रिया संबंधी जटिलताओं का सामना करना पड़ता था। सार्वभौमिक शपथ पत्र लागू होने के बाद अलग-अलग शपथ पत्रों की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी। सभी सरकारी कार्यालयों में स्वीकार होगा एक ही शपथ पत्र सरकार ने कहा, अब पूरे गुजरात में एक ही प्रारूप का शपथ पत्र मान्य होगा, जहां कानूनी रूप से शपथ पत्र देना जरूरी है।
लेकिन उसके लिए कोई विशेष प्रारूप निर्धारित नहीं किया गया है। नई व्यवस्था के तहत इस प्रारूप को जिला, तालुका, ग्रामीण और शहरी स्तर पर सभी सरकारी कार्यालयों, प्राधिकरणों और सेवा केंद्रों में अनिवार्य रूप से स्वीकार किया जाएगा। इसके अलावा, ऑनलाइन आवेदन करने वालों की सुविधा के लिए इसे डिजिटल गुजरात पोर्टल और जन सेवा केंद्रों पर भी लागू किया जाएगा। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया, जिन सेवाओं में कानूनी रूप से शपथ पत्र जमा करना जरूरी नहीं है, वहां पहले की तरह स्व-घोषणा (सेल्फ डिक्लेरेशन) की प्रक्रिया ही लागू रहेगी। ऐसे मामलों में शपथ पत्र अनिवार्य नहीं होगा। विज्ञप्ति में कहा गया है कि नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विधि विभाग ने इस आधिकारिक प्रारूप को गुजराती और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में तैयार किया है।
एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में नागरिक सेवाओं को सरल और सुगम बनाने के प्रयासों के तहत राज्य के विधि विभाग ने यह फैसला लिया है। विज्ञप्ति में कहा गया, अब तक नागरिकों को विभिन्न सरकारी विभागों की योजनाओं और सेवाओं का लाभ लेने के लिए अलग-अलग प्रकार के शपथ पत्र जमा करने पड़ते थे। इससे लोगों को असुविधा, देरी और प्रक्रिया संबंधी जटिलताओं का सामना करना पड़ता था। सार्वभौमिक शपथ पत्र लागू होने के बाद अलग-अलग शपथ पत्रों की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी।सरकार ने कहा, अब पूरे गुजरात में एक ही प्रारूप का शपथ पत्र मान्य होगा, जहां कानूनी रूप से शपथ पत्र देना जरूरी है।
लेकिन उसके लिए कोई विशेष प्रारूप निर्धारित नहीं किया गया है। नई व्यवस्था के तहत इस प्रारूप को जिला, तालुका, ग्रामीण और शहरी स्तर पर सभी सरकारी कार्यालयों, प्राधिकरणों और सेवा केंद्रों में अनिवार्य रूप से स्वीकार किया जाएगा। इसके अलावा, ऑनलाइन आवेदन करने वालों की सुविधा के लिए इसे डिजिटल गुजरात पोर्टल और जन सेवा केंद्रों पर भी लागू किया जाएगा।
