राहुल का दावा- 12वीं की आंसरशीट मोबाइल से स्कैन करवाईं:खास वेंडर को फायदा पहुंचाया; रीवैल्युएशन फीस पर कहा- CBSE के जेबकतरों से सावधान
राहुल का दावा- 12वीं की आंसरशीट मोबाइल से स्कैन करवाईं: खास वेंडर को फायदा पहुंचाया; रीवैल्युएशन फीस पर कहा- CBSE के जेबकतरों से सावधान नई दिल्ली राहुल गांधी ने 30 मई को कहा था इस साल चार परीक्षाएं हुईं, एक करोड़ बच्चे शामिल हुए। एक भी ईमानदारी से नहीं हो
राहुल का दावा- 12वीं की आंसरशीट मोबाइल से स्कैन करवाईं: खास वेंडर को फायदा पहुंचाया; रीवैल्युएशन फीस पर कहा- CBSE के जेबकतरों से सावधान नई दिल्ली राहुल गांधी ने 30 मई को कहा था इस साल चार परीक्षाएं हुईं, एक करोड़ बच्चे शामिल हुए। एक भी ईमानदारी से नहीं हो पाई- फाइल फोटो कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने CBSE की टेंडर प्रक्रिया में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि छात्रों की आंसरशीट को ऑटोमैटिक रोबोटिक स्कैनर की बजाय मोबाइल फोन से स्कैन किया गया। राहुल गांधी ने छात्र सार्थक सिद्धांत की X पोस्ट शेयर करते हुए कहा कि अगस्त में ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम का टेंडर दोबारा जारी किया गया था। उस समय कई जरूरी शर्तें हटा दी गईं और स्कैनिंग की क्वालिटी भी 300 DPI से घटाकर 200 DPI कर दी गई। राहुल ने कहा कि धुंधली आंसरशीट, गायब पन्ने और कई कॉपियों का स्कैन न होना सिर्फ तकनीकी गलती नहीं है। उनके मुताबिक, यह सब किसी खास वेंडर को फायदा पहुंचाने के लिए किए गए कॉन्ट्रैक्ट का नतीजा है। CBSE के OSM सिस्टम और टेंडर प्रोसेस पर राहुल के बयान यह एक धोखा है। और हर वह बच्चा, जिसके अंकों का गलत मूल्यांकन हुआ है, वह इस धोखे का शिकार है। धर्मेंद्र प्रधान अभी भी अपने पद पर बने हुए हैं। मोदी जी की यह चुप्पी अब सिर्फ उनकी उदासीनता नहीं रही। यह इस अपराध में उनकी मिलीभगत को दर्शाती है। जब शिक्षा को सेवा नहीं, कारोबार बना दिया जाए तब गलती सुधारी नहीं जाती। बढ़ाई जाती है और इसकी सबसे बड़ी कीमत हमारे बच्चे चुका रहे हैं। अपने समय, आत्मविश्वास और भविष्य से। वह फोटो, जिसमें कॉपी स्कैनिंग की गलतियां दिखाई स्टूडेंट सिद्धांत कुमार के सवाल... स्टूडेंट सिद्धांत कुमार ने कथित तौर पर स्कैन की गई कॉपियों के फोटो शेयर किए हैं। उन्होंने लिखा है- CBSE, आपने कहा था कि इन कॉपियों को स्कैन करने के लिए आपने स्कैनर्स का इस्तेमाल किया था। अब, जबकि ये कॉपियां आम लोगों के देखने के लिए उपलब्ध हैं, तो क्या आप यह बताने की कृपा करेंगे कि स्कैनर से स्कैन किए जाने पर किन कॉपियों में ‘ड्रॉप शैडो’ आता है। और ये तीन मोड़ (फोल्ड) कैसे आए। राहुल ने रीवैल की फीस पर भी सवाल उठाए राहुल ने CBSE की आंसरशीट जांच और रीइवैल्यूएशन की फीस को लेकर केंद्र सरकार और बोर्ड पर भी सवाल खड़े किए।
उन्होंने X पोस्ट पर लिखा जेबकतरों से सावधान - आज वो CBSE के अंदर बैठे हैं। CBSE की गलती से नंबर गलत आए तो आपको क्या मिलता है।एक बिल,अपनी ही की सही जांच आंसरशीट के लिए एक बच्चे को ₹2000 तक भरने पड़ सकते हैं।सोचिए, जब 4 लाख बच्चों ने ऐसे आवेदन डालें हैं तो CBSE कितनी कमाई कर रहा है।जब स्कैनिंग फोन से हुई हो, ग़लत मार्किंग तय है। और उसे ठीक करवाने की कीमत बच्चा भर रहा है।गलती CBSE की। सजा बच्चे की। कमाई सरकार की। एक दिन पहले CBSE 12वीं के स्टूडेंट्स से भी मिले राहुल गांधी ने CBSE 12वीं क्लास के छात्रों से मुलाकात की थी। उन्होंने X पर छात्रों से बातचीत का 1.30 मिनट का वीडियो पोस्ट किया था। कैप्शन में लिखा- जिन साहसी युवाओं ने CBSE और मोदी सरकार से आसान सवाल पूछे, उन्हें जवाब की जगह अपमान मिला। वीडियो में छात्रों ने राहुल से कहा- आंसर शीट को लेकर सवाल पूछने पर हमें एंटी-नेशनल, डीप स्टेट एजेंट्स (जासूस), आतंकवादी और पाकिस्तानी कहा गया। राहुल ने हंसते हए कहा- 17 साल के डीप स्टेट एजेंट्स। राहुल से जिन छात्रों से बात की, उनमें वेदांत भी शामिल थे। वेदांत की एक पोस्ट वायरल हुई थी, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि री-इवैल्यूएशन के दौरान पोर्टल पर उनकी फिजिक्स कॉपी की जगह किसी और की कॉपी अपलोड की गई थी। वेदांत के बाद कई अन्य छात्रों ने भी ऐसी शिकायतें कीं। अब पढ़िए, राहुल और छात्रों के बीच क्या बातचीत हुई वेदांत- मेरा एग्जाम बहुत अच्छा गया था लेकिन मेरे नंबर अच्छे नहीं आए। उसके बाद हमारे पास ऑप्शन था कि अगर नंबर कम आते हैं तो अपनी आंसर शीट की फोटोकॉपी के लिए अप्लाई करते हैं। जब मैंने फिजिक्स के आंसर शीट की फोटोकॉपी देखी तो पहले पेज पर मेरी हैंडराइटिंग थी। दूसरे पन्नों पर किसी और की हैंडराइटिंग थी। इसके बाद मैंने देखा कि ये मेरे शीट नहीं है, तो मैं अपनी दिक्कत X पर लेकर आया। वहां मुझे लोगों को सपोर्ट मिला क्योंकि ये तो एकदम हटके मामला है। मेरा एग्जाम बहुत अच्छा गया था लेकिन मेरे नंबर अच्छे नहीं आए। उसके बाद हमारे पास ऑप्शन था कि अगर नंबर कम आते हैं तो अपनी आंसर शीट की फोटोकॉपी के लिए अप्लाई करते हैं। जब मैंने फिजिक्स के आंसर शीट की फोटोकॉपी देखी तो पहले पेज पर मेरी हैंडराइटिंग थी।
दूसरे पन्नों पर किसी और की हैंडराइटिंग थी। इसके बाद मैंने देखा कि ये मेरे शीट नहीं है, तो मैं अपनी दिक्कत X पर लेकर आया। वहां मुझे लोगों को सपोर्ट मिला क्योंकि ये तो एकदम हटके मामला है। दूसरा छात्र- लेकिन जब इस पर लोगों का आक्रोश बढ़ने लगा तो हमें शांत कराने के लिए, उन्हें लगा कि हम कोई डीप स्टेट एजेंट्स हैं जो भारत में अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन जब इस पर लोगों का आक्रोश बढ़ने लगा तो हमें शांत कराने के लिए, उन्हें लगा कि हम कोई डीप स्टेट एजेंट्स हैं जो भारत में अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। राहुल (हंसते हुए) - 17 साल के डीप स्टेट एजेंट्स, भैया दिखाओ इन टेरररिस्ट के चेहरे दिखाओ जरा। 17 साल के डीप स्टेट एजेंट्स, भैया दिखाओ इन टेरररिस्ट के चेहरे दिखाओ जरा। छात्र- सोरोस। सोरोस। राहुल (हंसते हुए)- सोरोस? सोरोस आ गया इसमें बीच में। पाकिस्तान, सोरोस, सब आ गए। सोरोस? सोरोस आ गया इसमें बीच में। पाकिस्तान, सोरोस, सब आ गए। दूसरा छात्र- वे हमें एंटी-नेशनल और पाकिस्तानी कहने लगे। वे हमें एंटी-नेशनल और पाकिस्तानी कहने लगे। राहुल- दिस इज क्रेजी। दिस इज क्रेजी। दूसरा छात्र- दिस इज वेरी क्रेजी, यह सही नहीं है। दिस इज वेरी क्रेजी, यह सही नहीं है। राहुल- आप लोग स्टूडेंट्स हैं। आपका इन सब चीजों से कोई लेना-देना नहीं है। आप अपने आंसर शीट के बारे में पूछ रहे हैं। बस इतना ही। अब अचानक आप एंटी-नेशनल बन गए। आपको उस समस्या को मानना होगा जिसे आप हल करना चाहते हैं। आप बस समस्या को मानने से इनकार कर रहे हैं। आप (सरकार) बेचारे बच्चों को दोष दे रहे हैं। कह रहे हैं कि स्टूडेंट्स डीप स्टेट, जासूस, आतंकवादी हैं। आतंकवादी भी बोला? आप लोग स्टूडेंट्स हैं। आपका इन सब चीजों से कोई लेना-देना नहीं है। आप अपने आंसर शीट के बारे में पूछ रहे हैं। बस इतना ही। अब अचानक आप एंटी-नेशनल बन गए। आपको उस समस्या को मानना होगा जिसे आप हल करना चाहते हैं। आप बस समस्या को मानने से इनकार कर रहे हैं। आप (सरकार) बेचारे बच्चों को दोष दे रहे हैं। कह रहे हैं कि स्टूडेंट्स डीप स्टेट, जासूस, आतंकवादी हैं। आतंकवादी भी बोला? छात्र- हां, सब बोला। हां, सब बोला। राहुल (हंसते हुए)- शाबाश कांग्रेस बोली- 20 लाख छात्रों की प्राइवेसी खतरे में कांग्रेस ने CBSE की OSM प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि क्लास 12 के करीब 20 लाख छात्रों की कॉपियां पब्लिक डोमेन में उपलब्ध थीं।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इसे बड़ा डेटा लीक बताते हुए छात्रों की निजता पर गंभीर खतरा बताया है। 27 मई: राहुल ने OSM का काम करने वाली कंपनी पर सवाल उठाए थे राहुल गांधी ने 27 मई को OSM का काम करने वाली कंपनी COEMPT पर भी सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा कि CBSE ने जिस COEMPT कंपनी को एग्जाम के डिजिटल इवैल्यूएशन का ठेका दिया है, उसका पहले ग्लोबारिना नाम था। राहुल ने सवाल किया कि COEMPT को CBSE का ठेका क्यों और किसके कहने पर दिया गया। कौन-कौन से नियम और प्रक्रियाएं दरकिनार करके इस कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट दिया गया। COEMPT पहले ग्लोबारिना नाम से विवादों में घिर चुकी थी, यह बात CBSE को क्यों नहीं पता चली? COEMPT प्रबंधन और मोदी सरकार के बीच क्या संबंध हैं। CBSE ने कहा- कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट देने में नियमों का पालन हुआ हालांकि, CBSE ने राहुल के आरोपों को खारिज किया। CBSE मुख्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि COEMPT एडूटेक को कॉन्ट्रैक्ट देने में सभी जनरल फाइनल्स रूल्स और तय प्रक्रियाओं का पालन किया गया। आरोप गलत, भ्रामक और तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। CBSE का कहना है कि इससे चेकिंग ज्यादा तेज और सटीक ढंग से होती है और मार्क्स जोड़ने या डेटा एंट्री में होने वाली गड़बड़ियों में कमी आती है। रिजल्ट के बाद उल्टा हुआ। स्टूडेंट्स ने सर्वर डाउन, पेमेंट फेल होने और ब्लर पेज जैसी शिकायतें कीं। COEMPT पर तेलंगाना बोर्ड एग्जाम में गड़बड़ी के आरोप COEMPT एडूटेक तेलंगाना के दराबाद की कंपनी है। ये फर्म तेलंगाना, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों मे डिजिटल इवैल्यूएशन का काम करती है। 2019 में इसका नाम ग्लोबरेना टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड था। तब इस पर तेलंगाना में 12वीं के बोर्ड एग्जाम में डेटा प्रोसेसिंग में गड़बड़ी के आरोप लगे थे। उस साल राज्य में 9.74 लाख में से 3 लाख से ज्यादा बच्चे फेल हो गए थे।