क्या है प्रकाश प्रदूषण? मेट्रो सिटी की रातें 60% तक अधिक चमकीली
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। आधुनिक विकास और शहरीकरण की चकाचौंध ने भारत की रातों को पूरी तरह बदल दिया है। प्रकाश प्रदूषण (Light Pollution) की समस्या अब इतनी गंभीर हो चुकी है कि देश के प्रमुख महानगरों की रातें प्राकृतिक अंधेरे की तुलना में 60 गुना तक अधिक चमकदार हो
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। आधुनिक विकास और शहरीकरण की चकाचौंध ने भारत की रातों को पूरी तरह बदल दिया है। प्रकाश प्रदूषण (Light Pollution) की समस्या अब इतनी गंभीर हो चुकी है कि देश के प्रमुख महानगरों की रातें प्राकृतिक अंधेरे की तुलना में 60 गुना तक अधिक चमकदार हो गई हैं। एक स्टडी के अनुसार, तेजी से बढ़ता हुआ प्रकाश प्रदूषण इंसान के स्वास्थ्य, पर्यावरण और वन्यजीवों के लिए भी बड़ा खतरा बन गया है। प्रकाश प्रदूषण की बढ़ती वजहें प्रकाश प्रदूषण की सबसे बड़ी वजह LED लाइट्स का तेजी से बढ़ता उपयोग, सड़कों पर लगाए जा रहे स्ट्रीट लाइट्स और लगातार बढती गाड़ियां हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, स्थानीय निकायों में 10 साल में 1.34 करोड़ से ज्यादा स्ट्रीट लाइट लगाई जा चुकी हैं। उजाला योजना के तहत 36 करोड़ से अधिक LED बल्ब बांटे गए हैं। देश में 35 करोड़ से ज्यादा रजिस्टर्ड गाड़ियां हैं जो रात के समय रोशनी बढ़ाते हैं। 2014 से 2024 के बीच बिजली खपत दोगुनी होकर 1,623 टेरावॉट-घंटे तक पहुंच गई है। भारत की स्थिति परेशान करने वाली 2024 के आंकड़ों के मुताबिक, भारत की 50% से ज्यादा आबादी प्रकाश प्रदूषण का सामना कर रही है। वैश्विक स्तर पर 80% आबादी रात में कृत्रिम रोशनी प्रभावित क्षेत्रों में रहती है।
भारत में 2014 से 2022 के बीच कृत्रिम रोशनी में औसतन 16% की वृद्धि दर्ज की गई है। खबरें और भी स्वास्थ्य और पर्यावरण पर असर प्रकाश प्रदूषण इंसानों की नींद, फूल खिलने और पक्षियों के प्रवासन को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। रात में मेलाटोनिन हार्मोन का स्तर घटने से डायबिटीज, डिप्रेशन, हार्ट डिजीज और कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। प्रवासी पक्षी दिशा भ्रमित होकर शिकार बन रहे हैं, जबकि कीटों की आबादी तेजी से घट रही है। शहरों की रातें कितनी चमकौली? नई दिल्ली: 61 गुना बेंगलुरु: 59 गुना मुंबई: 52 गुना अहमदाबाद: 44 गुना इंदौर: 42 गुना पटना: 36 गुना जयपुर: 33 गुना क्या है समाधान?
चिंता की बात यह है कि भारत में प्रकाश प्रदूषण को लेकर कोई स्पष्ट कानून नहीं है। पर्यावरणविद् डॉ. सुभाष सी पांडे कहते हैं, 'वायु, जल या ध्वनि प्रदूषण पर कानून हैं, लेकिन प्रकाश प्रदूषण को अभी भी गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।'
