'पुलिस ने डंडों में कीलें ठोकीं, महिलाओं के कपड़े फाड़े':युवती बोली- 2 साल NEET की तैयारी की, परिवार ने छुड़वाकर पॉलिटेक्निक में एडमिशन कराया
हम 19 जुलाई को सिरसा से दिल्ली पहुंचे थे। 20 को जंतर-मंतर गए। वहां दो-तीन जगह बैरिकेडिंग की गई थी।
हम 19 जुलाई को सिरसा से दिल्ली पहुंचे थे। 20 को जंतर-मंतर गए। वहां दो-तीन जगह बैरिकेडिंग की गई थी। करीब एक घंटे तक नारेबाजी हुई, जिसके बाद पुलिस ने अचानक लाठीचार्ज कर दिया। महिलाओं को धक्के दिए गए और उनके कपड़े फाड़ दिए गए। एक गर्भवती महिला को भी दूर धकेल दिया। यह दावा सिरसा के दारेवाला गांव निवासी सरोज रानी का है। सरोज 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद मार्च में शामिल होने दिल्ली गई थीं। इस दौरान उन्हें पुलिस ने डिटेन किया था। सिरसा लौटने के बाद दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने प्रदर्शन के दौरान हुई कार्रवाई को लेकर कई आरोप लगाए। सरोज के साथ मार्च में शामिल हुई अन्य युवतियों ने भी वहां का माहौल बताया। इन्हीं में शामिल पायल ने बताया- मैंने दो साल तक NEET की तैयारी की थी, लेकिन पेपर में गड़बड़ियों के बाद मेरे परिवार ने तैयारी छुड़वाकर एडमिशन सिरसा के पॉलिटेक्निक कॉलेज में करवा दिया। 'महिलाओं के कपड़े फाड़े, डंडों में कीलें ठोक रखी थीं ' सिरसा के दारेवाला गांव निवासी सरोज रानी ने कहा- "20 जुलाई को मैं खुद जंतर-मंतर पर मौजूद थी। मैंने अपनी आंखों से देखा कि पुलिसकर्मियों ने हमारी बच्चियों के कपड़े फाड़ दिए और उन्हें अर्धनग्न कर दिया। यह बेहद शर्मनाक था। बच्चों के साथ हर अभिभावक खड़ा है और उनके समर्थन में आवाज उठाना जरूरी था।
प्रदर्शन स्थल पर न शौचालय की व्यवस्था है और न ही पीने के पानी की। मैंने अपनी आंखों से देखा कि यदि प्रदर्शन स्थल पर खाना भी पहुंचता है तो वह बच्चों तक नहीं पहुंच पाता, क्योंकि वहां प्रदर्शनकारियों की संख्या बहुत ज्यादा है। सरकार ने बच्चों को 'कॉकरोच' कहकर अपनी घटिया मानसिकता दिखाई है। पिछले 12 साल में पहली बार प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे पर सामने आकर बातचीत की है। वरना वह सिर्फ 'मन की बात' करते रहे हैं। वहां का माहौल ऐसा है कि कोई भी अभिभावक अपने बच्चों को वहां ले जाना नहीं चाहेगा।" हमने भगत सिंह को दोबारा देखा है। पहले सिर्फ उनके बारे में पढ़ा और सुना था। पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और फायरिंग की, लेकिन बच्चों ने भी उनका डटकर सामना किया। वहां पत्थरों से भरे ट्रक लाए गए और डंडों में कीलें ठोंक रखी थीं। इतने बच्चों का खून बहने के बाद जाकर प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे पर मुंह खोला। अब जनता खुद तय करे कि उन्हें देश की ज्यादा चिंता है या हवाई यात्राओं की।" 'हमारे पेरेंट्स दिल्ली भेजने से डर रहे' सिरसा के आनंद विहार निवासी छात्रा पूजा ने बताया- "स्टूडेंट ने 20 जुलाई को शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने एवं संसद तक जाने को कहा था। इतनी बेरहमी से उनको मारा गया। एक पुलिस वाले ने तो अपने डंडे पर कील लगा रखी थी।
हमारे पेरेंट्स हमें वहां जाने नहीं दे रहे। वो डर रहे हैं कि बच्चों को कुछ हो ना जाए। हम अपने जिले में रहकर आवाज उठा सकते हैं। एक ये NEET एग्जाम की बात नहीं है, हर एग्जाम में हेरा-फेरी हुई है। CJL में हेरा-फेरी हुई। मैंने साल 2024 में BSF का फॉर्म भरा था। मेरे साथ और भी स्टूडेंट स्टेडियम में तैयारी करने के लिए आते थे। सभी का फिजिकल भी क्लीयर हुआ। हमारा फिजिकल इतनी दूर था कि हमारा पांच से दस हजार के बीच खर्चा आया। वो क्या फ्री के आए थे? उसका अभी तक एग्जाम नहीं हुआ। सरकार क्या कर रही है? हम अपना भविष्य कहां देखें। अभी सरकारी भर्ती के लिए पेपरों की तैयारी कर रही हूं।" 'NTA चेयरमैन का नहीं, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा चाहिए' पूजा ने कहा- "यह सिर्फ NEET पेपर लीक का मामला नहीं है। आज ऐसे कई युवा हैं, जिन्होंने बीएससी और एमएससी जैसी डिग्रियां हासिल की हैं, लेकिन 10-10 साल पढ़ाई करने के बाद भी बेरोजगार घूम रहे हैं। सरकारी भर्तियों की तैयारी में काफी समय और पैसा खर्च होता है। आवेदन फॉर्म भरने के लिए भी फीस देनी पड़ती है। जिनके माता-पिता सरकारी नौकरी में हैं, वे किसी तरह खर्च उठा लेते हैं, लेकिन कई परिवारों के लिए यह संभव नहीं होता। सरकार ने एनटीए के चेयरमैन का इस्तीफा मांगा है, लेकिन यह सिर्फ एनटीए का मामला नहीं है।