Railway: रेल मंत्री का बड़ा बयान, BNS के तहत केस दर्ज नहीं कर सकती RPF; किसके पास कार्रवाई की जिम्मेदारी?
रेलवे में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अक्सर यात्रियों के मन में यह सवाल उठता है कि किसी अपराध की स्थिति में कार्रवाई कौन करता है।
रेलवे में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अक्सर यात्रियों के मन में यह सवाल उठता है कि किसी अपराध की स्थिति में कार्रवाई कौन करता है। इसी मुद्दे पर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में बड़ा स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने कहा कि रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत किसी भी मामले में एफआईआर दर्ज करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने बताया कि बीएनएस से जुड़े मामलों में कार्रवाई की जिम्मेदारी सरकार रेलवे पुलिस (जीआरपी) या संबंधित जिला पुलिस की होती है। बीएनएस के तहत केस कौन दर्ज करता है? राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल के लिखित जवाब में अश्विनी वैष्णव ने आरपीएफ और जीआरपी के कामकाज के बीच अंतर स्पष्ट किया।
उन्होंने कहा कि आरपीएफ को केवल रेलवे संपत्ति (गैरकानूनी कब्जा) अधिनियम, 1966 और रेलवे अधिनियम, 1989 के तहत मामले दर्ज करने का अधिकार मिला है। ये कानून रेलवे की संपत्ति की चोरी, गैरकानूनी कब्जे और उसके अवैध निपटान जैसे मामलों से जुड़े हैं। रेल मंत्री ने बताया कि भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार पुलिस और कानून-व्यवस्था राज्य का विषय है। इसलिए रेलवे में होने वाले अपराधों की रोकथाम, अपराध दर्ज करना, जांच करना और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों की होती है। यह काम जीआरपी या जिला पुलिस अपने-अपने अधिकार क्षेत्र के अनुसार करती है। BNS के तहत आने वाले सभी मामलों की एफआईआर और जांच भी यही एजेंसियां करती हैं।
जीआरपी का खर्च कौन उठाता है? अश्विनी वैष्णव ने बताया कि जीआरपी का 50 प्रतिशत वेतन रेलवे वहन करता है। हालांकि इसके बावजूद जीआरपी राज्य सरकार के अधीन काम करती है और अपराधों की जांच का अधिकार उसी के पास रहता है। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने जीआरपी और जिला पुलिस के अधिकार क्षेत्र पहले से तय कर रखे हैं, जिसके अनुसार कार्रवाई की जाती है। आरपीएफ की भूमिका क्या होती है? रेल मंत्री ने कहा कि आरपीएफ का मुख्य काम जीआरपी और जिला पुलिस के प्रयासों को मजबूत करना है, ताकि यात्रियों और रेलवे परिसरों की सुरक्षा बेहतर तरीके से सुनिश्चित की जा सके।
उन्होंने कहा कि यदि बीएनएस के तहत कोई मामला सामने आता है तो आरपीएफ उसे संबंधित जीआरपी या जिला पुलिस को भेजती है, ताकि आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सके। उन्होंने दोहराया कि आरपीएफ को बीएनएस के तहत केस दर्ज करने का अधिकार नहीं है, लेकिन रेलवे संपत्ति (गैरकानूनी कब्जा) अधिनियम, 1966 और रेलवे अधिनियम, 1989 के तहत वह मामले दर्ज कर सकती है।
