पुलिस के दावे में कितनी सच्चाई: CJP के प्रदर्शन में क्या चलाई गई पैलेट गन? हैरान कर देगी डॉक्टर की रिपोर्ट
सफदरजंग अस्पताल से इलाज कराकर लौटे 25 वर्षीय पीड़ित ने बताया कि उन्हें लगता था कि पैलेट गन का इस्तेमाल सिर्फ कश्मीर में होता है।
सफदरजंग अस्पताल से इलाज कराकर लौटे 25 वर्षीय पीड़ित ने बताया कि उन्हें लगता था कि पैलेट गन का इस्तेमाल सिर्फ कश्मीर में होता है। उन्होंने बताया कि जंतर-मंतर पर आंसू गैस के गोलों और पथराव के बीच जब एक पुलिसकर्मी ने उन पर बंदूक तानी, तो वे भागने लगे। भागते समय उनकी पीठ और दाहिनी कोहनी में छर्रे लगे। उनके अस्पताल के मेडिकल रिकॉर्ड में भी पैलेट से लगी चोट का उल्लेख है।एक अन्य छात्र शेख इरशाद मंसूरी (25 वर्ष) लेडी हार्डिंग अस्पताल में भर्ती हैं। दावा है कि उनके चेहरे और शरीर पर कई छर्रे लगे हैं, जबकि एक छर्रा उनकी गर्दन की मुख्य नस के पास फंसा हुआ है।
उनके दोस्त का आरोप है कि पालिका बाजार के पास एक आरएएफ जवान ने उन पर निशाना साधकर गोली चलाई थी। इरशाद गुरुग्राम में कार्यरत एमबीए ग्रेजुएट हैं। सर्जरी के बाद उन्होंने बताया कि छर्रों ने उनकी आंख, गाल, नाक, ठोड़ी, गर्दन, कंधे और छाती को छलनी कर दिया। मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एक अन्य 19 वर्षीय युवा प्रदर्शनकारी की दाहिनी आँख में छर्रा लगा है, जिससे उसकी आँख की रोशनी वापस आने की केवल एक प्रतिशत संभावना ही बची है।इन आरोपों के जवाब में दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर फैक्ट चेक जारी किया। पुलिस ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन चलाने का दावा पूरी तरह से झूठा और भ्रामक है।
दिल्ली पुलिस के पास न तो पैलेट गन है और न ही वे इनका इस्तेमाल करते हैं। वहीं, पीआईबी फैक्ट चेक ने भी वायरल दावों को फेक करार दिया और लोगों से केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करने की अपील की।पैलेट गन (पंप-एक्शन गन) एक ऐसा हथियार है जिससे कारतूस छूटने पर एक साथ धातु के दर्जनों छोटे-छोटे छर्रे (पैलेट) बड़े इलाके में फैल जाते हैं। भारत में 2010 के कश्मीर विरोध प्रदर्शनों के बाद भीड़ नियंत्रण के कम घातक विकल्प के रूप में सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने इसका इस्तेमाल शुरू किया था। नियम के मुताबिक, इसे चेतावनी, वाटर कैनन और आंसू गैस के निष्फल होने के बाद केवल अंतिम उपाय के रूप में और कमर के नीचे चलाने का निर्देश होता है।कश्मीर के अलावा, जनवरी-फरवरी 2024 में हरियाणा के शंभू बॉर्डर पर किसान आंदोलन के दौरान और 2023 में मणिपुर में भी पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोप लगे थे, हालांकि हरियाणा पुलिस ने केवल रबड़ की गोलियां चलाने का दावा किया था।
अगर ये दावा सच हैं तो देश की राजधानी में आम नागरिकों के पैलेट गन से घायल होने का यह पहला मामला है।
