अनशन तोड़ने के बाद सोनम वांगचुक ने जारी किया वीडियो संदेश: सरकार से मिले तीन लिखित आश्वासन, मानी गईं ये मांगें
#WATCH | Activist Sonam Wangchuk says, "Today, on the 26th day, I would like to share some important news with you. It's about 12:30 at
#WATCH | Activist Sonam Wangchuk says, "Today, on the 26th day, I would like to share some important news with you. It's about 12:30 at night. Just a while ago, Union Ministers JP Nadda and Jitendra Singh came here, and the top leaders of the Apex Body of Ladakh also came here.… pic.twitter.com/NRktzrW9oe — ANI (@ANI) July 24, 2026 छात्रों पर नहीं होगी कानूनी कार्रवाई: जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले या 20 जुलाई को संसद चलो मार्च में शामिल होने वाले छात्रों और युवाओं के खिलाफ कोई भी कानूनी कार्रवाई या प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं की जाएगी। पीड़ित परिवारों को मुआवजा: पेपर लीक की घटना की वजह से जान गंवाने वाले 20 से अधिक बच्चों के परिवारों को सरकार उचित मुआवजा देगी।
संसद में होगी पूरी बहस: देश की संसद में इस पूरे मुद्दे, परीक्षा प्रणाली में सुधार और शिक्षा के क्षेत्र में सरकार की जवाबदेही तय करने पर विस्तार से बहस और चर्चा होगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। सोनम वांगचुक ने जानकारी दी कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, जितेंद्र सिंह और लद्दाख की एपेक्स बॉडी के शीर्ष नेता उनसे मिलने पहुंचे थे। इससे पहले विभिन्न राजनीतिक दलों के लगभग 65 सांसदों ने एक पत्र पर हस्ताक्षर करके सोनम वांगचुक से अनशन समाप्त करने का अनुरोध किया था। सांसदों और मंत्रियों ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि नीट (NEET) पेपर लीक और देश की परीक्षा प्रणाली के मुद्दे पर संसद में चर्चा की जाएगी।सोनम वांगचुक ने बताया कि पिछले दो दिनों से सरकार और उनके बीच बातचीत चल रही थी।
वे सरकार से लिखित में आश्वासन चाहते थे, जिसकी वजह से उन्हें दो दिन अतिरिक्त अनशन पर बैठना पड़ा। आखिरकार, सरकार ने उनकी मांगों पर लिखित आश्वासन दे दिया, जिसके बाद उन्होंने अनशन खत्म करने का निर्णय लिया।सोनम वांगचुक के अनुसार, सरकार ने लिखित में ये मांगें स्वीकार की हैं-केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के मुद्दे पर सोनम वांगचुक ने कहा कि सरकार इस बात का कोई आश्वासन नहीं दे सकी कि इस्तीफा कब होगा। उन्होंने बताया कि उनके पास दो रास्ते थे- या तो वे कई हफ्तों तक भूख हड़ताल जारी रखते जिससे उनकी जान जा सकती थी, या फिर अनशन समाप्त करते। उन्होंने कहा- पिछले 2-3 हफ्तों से हजारों लोग उनसे कह रहे थे कि संघर्ष को आगे बढ़ाने के लिए उनका जीवित रहना जरूरी है।उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा न देना सरकार के लिए खुद ही नुकसानदायक है।
अगर वे इस्तीफा दे देते तो सरकार का नुकसान रुक जाता। सोनम वांगचुक ने कहा कि उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि मासूम बच्चों पर कोई केस दर्ज न हो, क्योंकि उन्होंने लद्दाख में देखा है कि कैसे एफआईआर (FIR) बच्चों का भविष्य बर्बाद कर देती है। अंत में, सोनम वांगचुक ने मांगें पूरी होने पर खुशी व्यक्त की और इस आंदोलन को समर्थन देने के लिए सभी देशवासियों का धन्यवाद किया।
