विजेता का बर्गर, जब निजी पसंद नहीं रही खाने की प्लेट
भारतीय राजनीति में भोजन कभी सिर्फ भोजन नहीं रहा. वह पहचान भी रहा है, प्रतीक भी और कई बार सार्वजनिक नैतिकता की परीक्षा भी. लेकिन
भारतीय राजनीति में भोजन कभी सिर्फ भोजन नहीं रहा. वह पहचान भी रहा है, प्रतीक भी और कई बार सार्वजनिक नैतिकता की परीक्षा भी. लेकिन सोशल मीडिया के दौर में खाने की एक प्लेट अब निजी पसंद नहीं रह गई है.
वह राजनीतिक संदेश की तरह पढ़ी जाती है. सवाल यह नहीं रह गया कि आपने क्या खाया, बल्कि यह है कि आपने किस समय, किस
जगह और किस परिस्थिति में खाया. ताजा विवाद विजेता दहिया को लेकर है.
