प्रधान प्रश्न: समाधान की राह में फंसा शिक्षा मंत्री के इस्तीफे का कांटा, सरकार और विपक्ष की क्या है रणनीति?
मौजूदा नीट पेपर लीक, यूजीसी की विवादास्पद गाइड लाइन व एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार संबंधी पाठ्यक्रम के कारण प्रधान कई बार सरकार
मौजूदा नीट पेपर लीक, यूजीसी की विवादास्पद गाइड लाइन व एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार संबंधी पाठ्यक्रम के कारण प्रधान कई बार सरकार के लिए मुसीबत बने। उम्मीद जताई जा रही थी कि जल्द संभावित मंत्रिमंडल विस्तार में कम से कम प्रधान के विभाग में बदलाव तय है। हालांकि पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन के तूल पकड़ने के बाद सरकार की रणनीति किसी भी सूरत में विपक्ष को श्रेय देने की नहीं है। सरकार की पहली कोशिश संवाद और शिक्षा व्यवस्था में बदलाव का संदेश देकर समाधान निकालने पर है।इस मुद्दे पर बदली राजनीतिक परिस्थितियों में सरकार ही नहीं बल्कि विपक्ष और सीजेपी के रुख में बड़ा बदलाव आया है।
पहले संवाद से पूरी तरह दूरी बरत रही सरकार अब संवाद, चर्चा के साथ कार्रवाई के जरिये बीच का रास्ता निकालना चाहती है। दूसरी ओर पहले चर्चा की मांग पर अड़ा विपक्ष अब इससे पहले शिक्षा मंत्री का इस्तीफा चाहता है। पहले खुद सरकार के द्वार पहुंची सीजेपी अब न सिर्फ प्रधान का इस्तीफा चाहती है, बल्कि सरकार से अपनी शर्तों पर बातचीत करना चाहती है।सरकार के रणनीतिकारों को लगा था कि सोनम वांगचुक के उस पत्र से बदलाव की स्थिति बनेगी, जिसमें उन्होंने संसद में चर्चा कराने, आंदोलनकारी छात्रों पर मुकदमा दर्ज न करने की शर्त रखी थी।
सरकार की योजना थी कि सीजेपी से बातचीत के बाद उनकी शर्तें मान ली जाएगी। इसके तहत सरकार दो दिनों से इस मुद्दे पर चर्चा का प्रस्ताव दे रही है। हालांकि, विपक्ष ने अपना रुख बदलते हुए प्रधान के इस्तीफे की शर्त रखी है।सरकार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ कार्रवाई कर विपक्ष को श्रेय नहीं देना चाहती। इसके अलावा, यूजीसी के विवादास्पद जाति संबंधी गाइडलाइन ने विद्यार्थी वर्ग को दो हिस्से में बांट दिया था। इनमें ओबीसी छात्र इस गाइडलाइन के समर्थन में थे।
सरकारी सूत्र ने कहा, इसी कारण सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने लोकसभा में कांग्रेस के इतर लाइन लेकर प्रधान के इस्तीफे की मांग नहीं की।
