असम में बाढ़ का कहर: 25 जिले, 1800 से अधिक गांवों में नौ लाख लोग प्रभावित; गृहमंत्री ने सीएम सरमा से की बात
केंद्रीय गृह मंत्री ने उन्हें भरोसा दिलाया कि केंद्र की अंतर-मंत्रालयी टीम जल्द असम का दौरा करेगी और बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करेगी।
केंद्रीय गृह मंत्री ने उन्हें भरोसा दिलाया कि केंद्र की अंतर-मंत्रालयी टीम जल्द असम का दौरा करेगी और बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करेगी। इसी आकलन के आधार पर केंद्र सरकार राज्य को राहत और प्रभावित परिवारों की आजीविका के पुनर्निर्माण के लिए आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने पर निर्णय लेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऊपरी क्षेत्रों में बादल फटने की घटनाओं के कारण अचानक आई बाढ़ ने लोगों के जीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। उन्होंने संकट की इस घड़ी में असम के लोगों के साथ खड़े रहने और केंद्र से सहयोग मिलने के लिए अमित शाह का आभार जताया।सीएम सरमा के अनुसार, इस बार की बाढ़ के पीछे ऊपरी इलाकों में बादल फटने की घटनाओं के साथ स्थानीय स्तर पर हुई असाधारण बारिश प्रमुख कारण रही है। राज्य में स्थानीय बारिश सामान्य से 436 फीसदी अधिक दर्ज की गई है। इसके चलते कई ऐसे गांव भी बाढ़ की चपेट में आ गए, जहां हाल के वर्षों में इस स्तर की बाढ़ नहीं देखी गई थी।
मुख्यमंत्री ने स्थिति को अभूतपूर्व बताते हुए कहा कि विनाश का पैमाना 'अकल्पनीय' है। बाढ़ की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि राज्य के 25 जिलों में 1800 से अधिक गांव प्रभावित हैं और नौ लाख से अधिक लोग इसकी चपेट में आए हैं। बाढ़ ने लोगों के घरों के साथ-साथ खेती, पशुधन और आजीविका को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। हजारों मवेशियों के बह जाने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर असर पड़ा है।बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए राज्य सरकार ने 148 से अधिक राहत शिविर स्थापित किए हैं। इन शिविरों में करीब 30 हजार विस्थापित लोग शरण लिए हुए हैं। प्रभावित परिवारों तक भोजन, पेयजल और अन्य जरूरी सामान पहुंचाने के लिए राहत दल लगातार काम कर रहे हैं। सबसे अधिक प्रभावित जिलों में अब तक तीन लाख किलोग्राम से अधिक चावल और अन्य आवश्यक राहत सामग्री भेजी जा चुकी है।
अधिकारियों के अनुसार, राहत सामग्री की अतिरिक्त खेप भी लगातार प्रभावित इलाकों में भेजी जा रही है।राज्य सरकार ने बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए विभिन्न विभागों और केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय करते हुए व्यापक राहत और बचाव अभियान शुरू किया है। भारतीय वायुसेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), जिला प्रशासन और अन्य राज्य एजेंसियों के जवान प्रभावित क्षेत्रों में चौबीसों घंटे राहत और बचाव कार्य में जुटे हैं। सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए हेलीकॉप्टर और नावों का इस्तेमाल किया जा रहा है। दुर्गम क्षेत्रों में फंसे लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का अभियान जारी है।मुख्यमंत्री ने कहा कि तत्काल राहत और बचाव कार्यों के साथ ही राज्य सरकार विभिन्न विभागों और केंद्र सरकार के साथ मिलकर प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए दीर्घकालिक पैकेज तैयार कर रही है।
इसका उद्देश्य बाढ़ का पानी उतरने के बाद प्रभावित परिवारों को अपनी जिंदगी और आजीविका दोबारा खड़ी करने में सहायता देना है। राज्य सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि आपात स्थिति नियंत्रित होने के बाद पड़ोसी राज्यों के साथ संरचित बातचीत शुरू की जाएगी। इसका उद्देश्य ऊपरी क्षेत्रों में बादल फटने और इससे जुड़ी अचानक आने वाली बाढ़ जैसी आपदाओं के प्रभाव को कम करने के लिए राज्यों के बीच बेहतर समन्वय और मजबूत आपदा प्रबंधन तंत्र विकसित करना है। केंद्र की टीम के दौरे से नुकसान का विस्तृत आकलन और पुनर्वास के लिए केंद्रीय सहायता का रास्ता साफ होने की उम्मीद है। फिलहाल राज्य के बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है।
