छात्रों के समर्थन में मौन हुए अन्ना: पीएम मोदी को चिट्ठी लिख जताया दुख, धर्मेंद्र प्रधान को लेकर कही ये बात
मौन प्रदर्शन: आंदोलन सुबह 11 बजे शुरू हुआ और दोपहर 1 बजे खत्म हुआ। आंदोलन सुबह 11 बजे शुरू हुआ और दोपहर 1 बजे खत्म
मौन प्रदर्शन: आंदोलन सुबह 11 बजे शुरू हुआ और दोपहर 1 बजे खत्म हुआ। आंदोलन सुबह 11 बजे शुरू हुआ और दोपहर 1 बजे खत्म हुआ। पीएम को पत्र: अन्ना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी भेजकर दिल्ली की हिंसा पर दुख जताया। अन्ना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी भेजकर दिल्ली की हिंसा पर दुख जताया। इस्तीफे की मांग: उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से सरकार नहीं गिरेगी, बल्कि भरोसा बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से सरकार नहीं गिरेगी, बल्कि भरोसा बढ़ेगा। कानून-व्यवस्था का सवाल: छात्रों के गुस्से को पुलिस की लाठी से दबाना गलत है। यह समाज की पीड़ा है। छात्रों के गुस्से को पुलिस की लाठी से दबाना गलत है। यह समाज की पीड़ा है।
संवाद की जरूरत: सरकार को छात्रों से सीधे बात करके रास्ता निकालना चाहिए। अन्ना हजारे का मौन प्रदर्शन सुबह 11 बजे शुरू हुआ और दोपहर 1 बजे समाप्त हुआ। उन्होंने बिना भाषण दिए शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया। आंदोलन खत्म होने के बाद उन्होंने कहा कि देश के सर्वोच्च नेतृत्व तक जनता और छात्रों की पीड़ा पहुंचाना उनका कर्तव्य है। इसके बाद वह अपने गांव रालेगण सिद्धि लौट गए।अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे पत्र में दिल्ली में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को दुखद बताया। उन्होंने लिखा कि युवाओं का आक्रोश केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं है, बल्कि उनके भविष्य और व्यवस्था पर भरोसे से जुड़ा सवाल है। उनके मुताबिक सरकार को इस मामले को संवेदनशीलता के साथ देखने की जरूरत है।अन्ना हजारे ने कहा कि यदि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा देते हैं तो इससे सरकार कमजोर नहीं होगी।
इसके उलट सरकार की जवाबदेही तय होगी और जनता का भरोसा बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जवाबदेही ही सबसे बड़ी ताकत होती है।अन्ना हजारे का कहना है कि छात्रों के गुस्से का जवाब लाठीचार्ज नहीं हो सकता। उन्होंने सरकार से अपील की कि बल प्रयोग के बजाय छात्रों से सीधे बातचीत कर समाधान निकाला जाए। उनका मानना है कि संवाद से ही विवाद खत्म हो सकता है।दिल्ली में हाल के दिनों में बड़ी संख्या में छात्र सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि पेपर लीक, परीक्षा में कथित धांधली और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया की कमी के कारण उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। उनका कहना है कि वर्षों की मेहनत बार-बार होने वाली अनियमितताओं की वजह से बेकार हो रही है।प्रदर्शन के दौरान स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए लाठीचार्ज किया और कई छात्रों को हिरासत में ले लिया।
इस कार्रवाई में कई प्रदर्शनकारी घायल हुए। इसके बाद छात्रों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग और तेज कर दी।अन्ना हजारे का कहना है कि उन्होंने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए प्रधानमंत्री तक छात्रों की आवाज पहुंचा दी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर क्या फैसला लेती है और छात्रों की मांगों पर किस तरह प्रतिक्रिया देती है।
