सड़क से संसद तक संग्राम: 'सरकार चर्चा चाहती तो पहले दिन ही कर लेती'; नीट विवाद पर खरगे ने केंद्र पर उठाए सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने गुरुवार को केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के आरोप का खंडन किया कि विपक्ष परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक पर चर्चा से
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने गुरुवार को केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के आरोप का खंडन किया कि विपक्ष परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक पर चर्चा से भाग रहा है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार असल में बहस चाहती, तो उसने विपक्ष की पहली मांग पर ही इसकी अनुमति दे दी होती। मल्लिकार्जुन खरगे ने क्या कहा? पत्रकारों से बात करते हुए, खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने इस मुद्दे पर उनके इरादों पर सवाल उठाया और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। खरगे ने कहा 'अगर वे चर्चा के लिए तैयार होते, तो जिस दिन हमने इसकी मांग की थी, उसी दिन से शुरू हो जाती।
वे तैयार क्यों नहीं थे? बाद में, आपने छात्रों पर लाठीचार्ज किया। हम सांसद हैं, लेकिन सत्ताधारी दल के लोगों ने खुद आज दरवाजा बंद कर दिया। उन्होंने आगे कहा कि उन्हें शर्म आनी चाहिए। जब तक वे (धर्मेंद्र प्रधान) इस्तीफा नहीं देते, तब तक यह काम नहीं चलेगा। प्रधानमंत्री अब तक चुप क्यों थे? अगर इस स्थिति के लिए कोई जिम्मेदार है, तो वह प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने खुलेआम अपने सांसदों को छात्रों के आंदोलन का विरोध करने के लिए कहा है। प्रधानमंत्री की मंशा सही नहीं है। उन्होंने कभी भी अहम मुद्दों पर बात नहीं की है।उन्होंने आगे कहा, 'हम नियम 267 के तहत चर्चा करना चाहते थे।
लेकिन सरकार इसके लिए सहमत नहीं हुई। उन्होंने राहुल, प्रियंका और अन्य लोगों का अपमान किया। हम शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद ही किसी भी चर्चा के लिए तैयार होंगे।'कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने शिक्षा मंत्री को बदलने से इनकार करने के केंद्र के फैसले की आलोचना की। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार लाखों छात्रों के भविष्य की बजाय एक मंत्री को प्राथमिकता क्यों दे रही है।प्रियांक खरगे ने कहा, 'अगर सरकार अब भी छात्रों की भावनाओं को नहीं समझती है, तो यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। धर्मेंद्र प्रधान भारत सरकार के लिए इतने महत्वपूर्ण क्यों हैं? वे प्रधानमंत्री, गृह मंत्री या मंत्रिमंडल के लिए कौन से रहस्य छिपा रहे हैं?
क्या वे इतने अपरिहार्य हैं कि करोड़ों छात्रों की पीड़ा के बावजूद सरकार एक जिम्मेदार मंत्री को भी नहीं हटा सकती? यह मेरी समझ से परे है।उन्होंने प्रधानमंत्री के छात्र संपर्क कार्यक्रमों को लेकर भी उन पर निशाना साधा। इसके साथ ही वास्तविक संवाद की कमी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री मन की बात और परीक्षा पे चर्चा जैसे कार्यक्रम तो आयोजित करते हैं, लेकिन छात्रों से बात करने का समय नहीं निकाल पाते। वे छात्रों के बिना ही अमृतकाल और विकसित भारत का निर्माण करना चाहते हैं। दिल्ली में जो हो रहा है वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।'
