जब मिस्र में तख्तापलट हुआ, सेना ने बिना खून बहाए राजशाही उखाड़ फेंकी थी
23 जुलाई 1952 को कर्नल जमाल अब्दुल नासिर और 89 अन्य स्वतंत्र अधिकारियों ने लगभग बिना रक्तपात के तख्तापलट कर राजशाही को उखाड़ फेंका था
23 जुलाई 1952 को कर्नल जमाल अब्दुल नासिर और 89 अन्य स्वतंत्र अधिकारियों ने लगभग बिना रक्तपात के तख्तापलट कर राजशाही को उखाड़ फेंका था.
राजा फारूक, जिनके शासन की भ्रष्टाचार और पहले अरब-इजराइल युद्ध में विफलताओं के लिए आलोचना की गई थी, उनको पद त्यागने और तख्तापलट के नाममात्र के नेता जनरल मुहम्मद नगुइब को सत्ता सौंपने के लिए मजबूर होना पड़ा.
क्रांतिकारियों ने जमीन का पुनर्वितरण किया. भ्रष्टाचार के आरोप में राजनेताओं पर मुकदमे चलाए और 1953 में राजशाही को समाप्त कर दिया.
