FCRA 2.0... विदेशी फंडिंग पर शिकंजा, 'विषैले’ Ngos पर सर्जिकल स्ट्राइक
सवाल उठ सकता है कि समाजसेवा, पढ़ाई और भलाई का काम करने का दावा करने वाले संगठनों और NGOs पर सरकार इतनी सख्त क्यों हो
सवाल उठ सकता है कि समाजसेवा, पढ़ाई और भलाई का काम करने का दावा करने वाले संगठनों और NGOs पर सरकार इतनी सख्त क्यों हो गई है? इंटेलिजेंस एजेंसियों के इनपुट, सरकारी आंकड़ों और दुनिया भर के हालात को देखें, तो साफ होता है कि फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट यानी FCRA में किए गए बदलाव सिर्फ कागजी कार्रवाई नहीं है, बल्कि देश की सिक्योरिटी, इकोनॉमी और सुरक्षा को मजबूत करने के लिए उठाया गया बड़ा फैसला है. जो संसद के मानसून सत्र में संबंधित विधेयक पास होने के बाद लागू हो जाएगा.
