CJP Protest: आप का आरोप- राहुल गांधी सीजेपी का आंदोलन कमजोर कर रहे, कॉकरोच पीएम और BJP के रवैये पर क्या बोले?
सीजेपी ने अपनी प्रवक्ता को क्यों हटाया? पीएम मोदी के पुराने बयान का जिक्र क्यों किया गया? भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के पोस्ट पर क्या
सीजेपी ने अपनी प्रवक्ता को क्यों हटाया? पीएम मोदी के पुराने बयान का जिक्र क्यों किया गया? भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के पोस्ट पर क्या कहा गया? इस पूरे विवाद की स्थिति क्या? सीजेपी ने अपनी प्रवक्ता विजेता दहिया के व्यवहार की सार्वजनिक रूप से निंदा की है। पार्टी ने कहा कि जब शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी और संगठन के सदस्य पुलिस कार्रवाई का सामना कर रहे थे, उस दौरान सामने आए उनके वीडियो संगठन के मूल्यों के अनुरूप नहीं थे। सीजेपी ने इसे असंवेदनशील और गलत निर्णय बताया। इसके बाद पार्टी ने विजेता दहिया को प्रवक्ता पद से हटाने और उनकी सभी आधिकारिक जिम्मेदारियां वापस लेने का फैसला किया।सीजेपी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक पुराने सोशल मीडिया पोस्ट का हवाला देते हुए सवाल उठाया।
पार्टी ने कहा कि जब अन्ना हजारे का आंदोलन चल रहा था, तब नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर लोकतंत्र विरोधी तरीके अपनाने का आरोप लगाया था और अन्ना के आंदोलन का समर्थन किया था। अब सीजेपी ने पूछा कि क्या वही नरेंद्र मोदी आज अपने खिलाफ हो रहे आंदोलन पर अलग रवैया अपना रहे हैं। पार्टी ने सवाल किया कि सरकार आंदोलनकारियों की बात सुनने और जिम्मेदारी लेने से पीछे क्यों हट रही है।भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने एक्स पर लिखा कि उनके घर के सामने धरना होने की वजह से उनके बेटे को परीक्षा केंद्र पहुंचने में आधे घंटे की देरी हुई।
उन्होंने यह भी कहा कि वह धरने पर बैठे लोगों के लिए चाय, नाश्ता और कंबल लेकर पहुंचेंगे। इस पर सीजेपी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि आधे घंटे की देरी से इतनी परेशानी हो सकती है, तो उन युवाओं की स्थिति भी समझनी चाहिए जो अपने भविष्य को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। पार्टी ने कहा कि प्रदर्शनकारी केवल अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं और इस पहलू पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।फिलहाल सीजेपी आंदोलन को लेकर सरकार, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और सीजेपी के अलग-अलग दावे सामने आए हैं।
AAP ने कांग्रेस पर आंदोलन कमजोर करने का आरोप लगाया है, जबकि सीजेपी ने पुलिस कार्रवाई और सरकार के रवैये पर सवाल उठाए हैं। वहीं, कांग्रेस की ओर से इस आरोप पर इस सामग्री में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। ऐसे में आंदोलन अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का भी केंद्र बन गया है।
