हवाई यात्रियों के लिए जरूरी खबर: किस एयरलाइन की उड़ान समय पर, कौन सबसे ज्यादा लेट? जानें किसके रिकॉर्ड बेहतर
किस एयरलाइन ने सबसे कम और सबसे ज्यादा उड़ानें रद्द कीं? यात्रियों ने सबसे ज्यादा शिकायतें किस बात की कीं? यात्रियों के लिए इस रिपोर्ट
किस एयरलाइन ने सबसे कम और सबसे ज्यादा उड़ानें रद्द कीं? यात्रियों ने सबसे ज्यादा शिकायतें किस बात की कीं? यात्रियों के लिए इस रिपोर्ट का क्या मतलब? जून 2026 में घरेलू विमानन बाजार में इंडिगो का दबदबा कायम रहा। कंपनी की बाजार हिस्सेदारी 66.3 प्रतिशत रही, जबकि एयर इंडिया ग्रुप 23.9 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर रहा। अकासा एयर की हिस्सेदारी 6.4 प्रतिशत दर्ज की गई। समय पर उड़ान भरने के मामले में भी इंडिगो सबसे आगे रही। प्रमुख हवाई अड्डों पर उसकी ऑन-टाइम परफॉर्मेंस (ओटीपी) 89.4 प्रतिशत रही। एयर इंडिया ग्रुप 85.9 प्रतिशत, अकासा एयर 82.7 प्रतिशत और एलायंस एयर 74.7 प्रतिशत के साथ इसके बाद रहे।
वहीं स्पाइसजेट की समय पर उड़ान भरने की दर केवल 33.5 प्रतिशत रही, जो सभी प्रमुख एयरलाइंस में सबसे कम है।डीजीसीए की रिपोर्ट के अनुसार, जून 2026 में उड़ान रद्द होने की दर सामान्य रही। सबसे कम उड़ानें रद्द करने वाली एयरलाइंस में इंडिगो और अकासा एयर शामिल रहीं। दोनों की कैंसिलेशन रेट केवल 0.20 प्रतिशत रही। दूसरी ओर, इंडिया वन एयर की 16.43 प्रतिशत और स्पाइसजेट की 6.23 प्रतिशत उड़ानें रद्द हुईं, जो सबसे ज्यादा रहीं। रिपोर्ट के मुताबिक, उड़ानें रद्द होने का सबसे बड़ा कारण तकनीकी खराबी रहा। कुल रद्द उड़ानों में 39.6 प्रतिशत मामले तकनीकी कारणों से जुड़े थे।
इसके अलावा 36.3 प्रतिशत उड़ानें परिचालन संबंधी कारणों, 20.3 प्रतिशत मौसम और 2.1 प्रतिशत व्यावसायिक कारणों से रद्द हुईं।जून 2026 के दौरान घरेलू एयरलाइंस के खिलाफ यात्रियों ने कुल 2,568 शिकायतें दर्ज कराईं। राहत की बात यह रही कि एयरलाइंस ने इन सभी शिकायतों का 100 प्रतिशत निपटारा कर दिया। सबसे अधिक 27.8 प्रतिशत शिकायतें सामान यानी बैगेज से जुड़ी थीं। इसके बाद 24.3 प्रतिशत शिकायतें उड़ानों से जुड़ी समस्याओं और 19.7 प्रतिशत शिकायतें टिकट रिफंड को लेकर दर्ज की गईं। इससे साफ है कि यात्रियों के लिए समय पर उड़ान के साथ-साथ सामान और रिफंड की सुविधा भी बड़ा मुद्दा बनी हुई है।डीजीसीए की यह रिपोर्ट यात्रियों को एयरलाइन चुनने में मदद कर सकती है।
यदि कोई यात्री समय पर पहुंचने को प्राथमिकता देता है, तो वह एयरलाइन की ऑन-टाइम परफॉर्मेंस को ध्यान में रख सकता है। वहीं, उड़ान रद्द होने की दर और शिकायतों के आंकड़े भी सेवा की गुणवत्ता का संकेत देते हैं। रिपोर्ट यह भी बताती है कि देश में हवाई यात्रा की मांग लगातार बढ़ रही है, लेकिन एयरलाइंस के सामने समय की पाबंदी, तकनीकी रखरखाव और बेहतर ग्राहक सेवा बनाए रखने की चुनौती भी बनी हुई है।
