ED: क्रिप्टो इंडस्ट्री में 'की ओपिनियन लीडर्स' बताकर किया 35 मिलियन USD का घोटाला, ये है 'ओवर-द-काउंटर' का खेल
आरोपी खुद को क्रिप्टो इंडस्ट्री में "की ओपिनियन लीडर्स" बताते हैं। आरोपी टेलीग्राम, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम, वेबसाइट आदि जैसे सोशल मीडिया नेटवर्क के ज़रिए शुरुआती टोकन
आरोपी खुद को क्रिप्टो इंडस्ट्री में "की ओपिनियन लीडर्स" बताते हैं। आरोपी टेलीग्राम, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम, वेबसाइट आदि जैसे सोशल मीडिया नेटवर्क के ज़रिए शुरुआती टोकन ऑफरिंग/प्राइवेट प्लेसमेंट का प्रचार करते हैं। वे ब्लॉकचेन डेवलपर्स के साथ अपने टाई-अप के ज़रिए वर्चुअल डिजिटल एसेट्स की शुरुआती टोकन ऑफरिंग/प्राइवेट प्लेसमेंट से डिस्काउंट पर अलॉटमेंट हासिल करने और देने का दावा करते हैं। वे अनजान निवेशकों को अपने प्रचारित टोकन में निवेश करने के लिए मनाते हैं। वे भारी रिटर्न का वादा करके वीडीए क्षेत्र में अनजान निवेशकों से वीडीए के रूप में पैसे इकट्ठा करते हैं। निवेशकों से वीडीए का वादा करते हैं, बाद में अलॉटमेंट देने से मुकर जाते हैं, रिटर्न न देकर उनके साथ धोखाधड़ी करते हैं।
आपराधिक साज़िश, धोखाधड़ी आदि के जरिए हासिल की गई अपराध की कमाई को आरोपी निजी कामों के लिए इस्तेमाल करते हैं, जैसे चल/अचल संपत्ति में निवेश, निजी खर्च, व्यावसायिक उद्देश्य आदि। ईडी के मुताबिक, मोहम्मद वसीम, सौरभ दीवान और वैभव गुप्ता नाम के आरोपियों ने शिकायतकर्ता का भरोसा जीतने के लिए प्राइवेट टेलीग्राम ग्रुप, आमने-सामने की मीटिंग और झूठी जानकारी का इस्तेमाल किया। उन्होंने शुरुआत में छोटे-मोटे क्रिप्टोकरेंसी ओटीसी ट्रांजैक्शन आसानी से पूरे किए, ताकि शिकायतकर्ता को बड़ी रकम निवेश करने के लिए उकसाया जा सके। आरोपियों ने झूठा दावा किया कि उनके पास MultiverseX, Kava, BEAM, GRASS, SUI, VANA, AGLD जैसे बड़े क्रिप्टो प्रोजेक्ट्स से गारंटीड और भारी डिस्काउंट वाले डायरेक्ट टोकन एलोकेशन मौजूद हैं।शिकायतकर्ता से लाखों डॉलर का निवेश मिलने के बाद, जब बाज़ार की स्थिति बेहतर हुई तो आरोपियों ने अचानक डिजिटल टोकन देना बंद कर दिया।
जो वादा उन्होंने निवेशकों से किया था, एकाएक उसका वितरण रोक दिया गया। इन्फ्लुएंसर्स ने क्रिप्टो वॉलेट के जरिए जो लाखों डॉलर का निवेश हासिल किया था, उसे बंगलूरू के रवींद्र के. को भेजा गया। बाद में पता चला है कि वही ओटीसी डील्स का मास्टरमाइंड है।काम करने के तरीके का पता लगाने के लिए ईडी ने इस मामले में दो दिन तक कई जगहों पर छापेमारी की है।ईडी को पीएमएलए, 2002 के तहत की गई तलाशी में ऐसे डिजिटल डिवाइस और ईमेल वॉलेट जैसे सबूत मिले हैं, जिनका इस्तेमाल अपराध से हुई कमाई को इधर-उधर करने में किया गया था। तलाशी के दौरान अपराध से हुई कमाई के तौर पर 8700 USDT की कीमत वाली वर्चुअल डिजिटल एसेट्स भी जब्त की गईं।
तलाशी से यह भी पता चला कि इस घोटाले की कीमत लगभग 35 मिलियन USD है, जो एफआईआर में बताई गई रकम (लगभग 10 मिलियन USD) से कहीं ज्यादा है। तलाशी में यह भी सामने आया कि कई विदेशी संस्थाओं/निवेशकों के साथ भी आरोपियों ने इसी तरह धोखाधड़ी की है। इन संस्थाओं/निवेशकों ने अभी तक कोई आपराधिक शिकायत दर्ज नहीं कराई है।
