Supreme Court: एल्गार परिषद केस में साढ़े 7 साल से जेल में गाडलिंग, तीसरे जज ने सुनवाई से खुद को किया अलग
सुरेंद्र गाडलिंग पर आरोप है कि उन्होंने माओवादियों की मदद की और इस मामले में फरार आरोपियों समेत कई सह-आरोपियों के साथ साजिश रची। उनके
सुरेंद्र गाडलिंग पर आरोप है कि उन्होंने माओवादियों की मदद की और इस मामले में फरार आरोपियों समेत कई सह-आरोपियों के साथ साजिश रची। उनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून (यूएपीए) और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। अभियोजन पक्ष का दावा है कि गाडलिंग ने भूमिगत माओवादियों को सरकारी गतिविधियों की गोपनीय जानकारी और कुछ क्षेत्रों के नक्शे उपलब्ध कराए थे। आरोप है कि उन्होंने माओवादियों से सूरजगढ़ खदानों के संचालन का विरोध करने को कहा और कई स्थानीय लोगों को आंदोलन से जुड़ने के लिए उकसाया। गाडलिंग पुणे में 31 दिसंबर 2017 को आयोजित एल्गार परिषद सम्मेलन में दिए गए कथित भड़काऊ भाषणों से जुड़े एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में भी आरोपी हैं।
पुलिस का दावा था कि इन भाषणों के कारण अगले दिन पुणे जिले के कोरेगांव-भीमा युद्ध स्मारक के पास हिंसा भड़की थी। जब मामला सुनवाई के लिए आया तो जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा ने कहा, यह किसी दूसरी पीठ के पास जाएगा, मेरे साथी जज को कुछ परेशानी है। जस्टिस चंद्रशेखर इस मामले की सुनवाई से अलग होने वाले तीसरे जज हैं। इससे पहले जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एएस चंदूरकर भी इस मामले से खुद को अलग कर चुके हैं।पिछले हफ्ते गाडलिंग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने इस मामले का जिक्र किया था और याचिका की जल्द सुनवाई की मांग की थी।
सिब्बल ने कहा था कि गाडलिंग साढ़े सात साल से जेल में हैं और उन्होंने जल्द सुनवाई की मांग की थी।उन्होंने कोर्ट को बताया था कि उनकी जमानत याचिका पर पहली बार 2023 में नोटिस जारी किया गया था। लेकिन बाद में कई बार जजों के सुनवाई से अलग होने के कारण मामला आगे नहीं बढ़ सका। उन्होंने पीठ से मामले की जल्द सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने की मांग की थी।8 अगस्त 2025 को गाडलिंग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील आनंद ग्रोवर ने भी तत्कालीन सीजेआई बीआर गवई से जल्द सुनवाई की मांग की थी। उन्होंने अपने मुवक्किल की लंबे समय से चल रही जेल में रहने की स्थिति का हवाला दिया था।
ग्रोवर ने कहा था, सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका की सुनवाई 11 बार टाली जा चुकी है।पिछले साल 27 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में गाडलिंग और कार्यकर्ता ज्योति जगताप की जमानत सुनवाई टाल दी थी। कोर्ट ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की उस याचिका पर भी सुनवाई टाल दी थी, जिसमें कार्यकर्ता महेश राउत को मिली जमानत को चुनौती दी गई थी। राउत को बॉम्बे हाईकोर्ट ने जमानत दी थी। लेकिन एनआईए के सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के बाद उस आदेश पर रोक लगा दी गई थी।
