पंजाब से 4 साल में 3 बार दिल्ली कूच:हर बार टकराव, लाल किला हिंसा से लेकर पैलेट गन, शुभकरण की मौत तक विवाद हुए
पंजाब के किसान आज (21 जुलाई) शंभू बॉर्डर पर इकट्ठा होकर दिल्ली कूच की जिद पर अड़े हैं। हरियाणा पुलिस ने बॉर्डर सील कर दिया
पंजाब के किसान आज (21 जुलाई) शंभू बॉर्डर पर इकट्ठा होकर दिल्ली कूच की जिद पर अड़े हैं। हरियाणा पुलिस ने बॉर्डर सील कर दिया है। यह पहली बार नहीं, जब किसान दिल्ली जा रहे हैं, इससे पहले भी पिछले चार साल में तीन बार दिल्ली कूच किया। 2020 में तीन कृषि कानूनों के विरोध में शुरू हुआ आंदोलन दिल्ली की सीमाओं तक पहुंचा और केंद्र सरकार को कानून वापस लेने पड़े। इसके बाद 2024 में MSP की कानूनी गारंटी समेत अन्य मांगों को लेकर दो बार दिल्ली कूच की कोशिश हुई, लेकिन दोनों बार हरियाणा सरकार ने शंभू और खनौरी बॉर्डर पर किसानों को रोक दिया। इन आंदोलनों के दौरान पुलिस कार्रवाई, हिंसक झड़पें, किसानों की मौत, इंटरनेट बंदी, अदालतों की दखल और राजनीतिक टकराव लगातार सुर्खियों में रहे…।
तीनों दिल्ली कूच की पूरी कहानी और उनसे जुड़े विवाद जानने के लिए पढ़िए पूरी रिपोर्ट… पहला दिल्ली कूच: दिल्ली पहुंचे, कानून वापस हुए; आंदोलन कई विवादों में भी घिरा कब: 25-26 नवंबर 2020 मुद्दा: तीन कृषि कानूनों का विरोध पंजाब समेत कई राज्यों के किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ दिल्ली के लिए रवाना हुए। हरियाणा में बैरिकेडिंग, वाटर कैनन और आंसू गैस के बावजूद किसान सिंघु, टिकरी और गाजीपुर बॉर्डर तक पहुंच गए। दिल्ली की सीमाओं पर करीब एक साल तक आंदोलन चला। केंद्र और किसान संगठनों के बीच 11 दौर की वार्ता हुई, लेकिन सहमति नहीं बनी। 12 जनवरी 2021 को सुप्रीम कोर्ट ने तीनों कृषि कानूनों के अमल पर रोक लगाते हुए विशेषज्ञ समिति बनाई, लेकिन किसान संगठनों ने समिति पर भरोसा नहीं जताया।
आखिरकार 19 नवंबर 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीनों कृषि कानून वापस लेने की घोषणा की और 9 दिसंबर 2021 को आंदोलन समाप्त हुआ। इस आंदोलन से जुड़े बड़े विवाद… दूसरा दिल्ली कूच: शंभू बॉर्डर बना टकराव का सेंटर कब: 13 फरवरी 2024 मुद्दा: MSP की कानूनी गारंटी, कर्ज माफी, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करना समेत अन्य मांगें। किसान मजदूर मोर्चा (KMM) और संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के नेतृत्व में किसान दिल्ली के लिए निकले। हरियाणा सरकार ने शंभू और खनौरी बॉर्डर पर सीमेंट बैरिकेड, कंटेनर, कंटीले तार और लोहे की कीलें लगाकर रास्ता बंद कर दिया। कई दौर की बातचीत के बावजूद किसान दिल्ली नहीं पहुंच सके। इस आंदोलन से जुड़े बड़े विवाद तीसरा दिल्ली कूच: 101 किसानों का जत्था भी नहीं बढ़ सका कब: 6 दिसंबर 2024 से मुद्दा: MSP की कानूनी गारंटी समेत लंबित मांगें।
करीब 10 महीने तक शंभू और खनौरी बॉर्डर पर डटे रहने के बाद किसानों ने रोज 101 किसानों के प्रतीकात्मक जत्थे के साथ दिल्ली कूच का फैसला किया। हरियाणा पुलिस ने हर बार उन्हें शंभू बॉर्डर पर रोक दिया और कोई भी जत्था दिल्ली की ओर नहीं बढ़ सका। इस आंदोलन से जुड़े बड़े विवाद