पुताई करने वाले हाथ अब थामेंगे स्टेथेस्कोप, अब बनेगा डॉक्टर
सूरज सुमन की कहानी इस बात का जीवंत उदाहरण है कि सपनों की ऊंचाई आर्थिक हालात नहीं, बल्कि इंसान का हौसला तय करता है. जिन
सूरज सुमन की कहानी इस बात का जीवंत उदाहरण है कि सपनों की ऊंचाई आर्थिक हालात नहीं, बल्कि इंसान का हौसला तय करता है. जिन हाथों में कभी पुताई का ब्रश था, उन्हीं हाथों में अब स्टेथेस्कोप होगा. यह सफलता सिर्फ एक छात्र की नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो अभावों के बावजूद अपने सपनों को जिंदा रखे हुए हैं.
