मानसरोवर में डुबकी नहीं, बाल्टी से हो रहा स्नान:2018 से चीनी रोक बरकरार; कैलाश परिक्रमा में टॉयलेट की कमी से बढ़ी मुश्किलें
कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को पवित्र मानसरोवर झील में डुबकी लगाने की अनुमति नहीं है। चीनी प्रशासन ने मानसरोवर झील को प्रदूषण
कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को पवित्र मानसरोवर झील में डुबकी लगाने की अनुमति नहीं है। चीनी प्रशासन ने मानसरोवर झील को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए झील में उतरकर स्नान करने पर प्रतिबंध लगा रखा है। ऐसे में श्रद्धालु झील से बाल्टी में पानी निकालकर स्नान कर धार्मिक परंपरा निभाते हैं। वहीं कैलाश परिक्रमा के दौरान डेरापुक और झुंझुपुई में शौचालयों की कमी से यात्रियों, खासकर महिलाओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हर यात्री को मिलती है एक बाल्टी कैलाश पर्वत के दर्शन के बाद मानसरोवर झील में डुबकी लगाना सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा मानी जाती है। लेकिन वर्ष 2018 के बाद चीनी प्रशासन ने झील में उतरकर स्नान करने पर रोक लगा दी। प्रशासन का कहना है कि यह फैसला मानसरोवर झील को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए लिया गया है। इस वर्ष भी यात्रा पर गए श्रद्धालुओं को शुरुआत में ही एक-एक बाल्टी दी गई। श्रद्धालुओं ने उसी बाल्टी से मानसरोवर का जल निकालकर स्नान किया और धार्मिक परंपरा पूरी की। परिक्रमा के दो पड़ावों पर टॉयलेट की दिक्कत यात्रा पूरी कर लौटे श्रद्धालुओं ने बताया कि भारत की ओर से कुमाऊं मंडल विकास निगम (KMVN) की व्यवस्थाएं अच्छी रहीं, लेकिन कैलाश परिक्रमा के दौरान डेरापुक और झुंझुपुई में शौचालयों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।
यात्री भूपेश पंत ने बताया कि परिक्रमा के दौरान टॉयलेट नहीं होने से काफी दिक्कत हुई। ‘जीवन में एक बार कैलाश जरूर जाना चाहिए’ कर्नाटक के बेंगलुरु से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर पहुंचे शैलेश सुमन और उनकी पत्नी रीना सुमन ने यात्रा को जीवन का अविस्मरणीय अनुभव बताया। मूल रूप से झारखंड निवासी दंपती ने कहा कि पूरी यात्रा भक्तिमय माहौल में सकुशल संपन्न हुई। उन्होंने कहा कि KMVN, ITBP, SSB, भारतीय सेना और चीन की ओर की व्यवस्थाएं संतोषजनक रहीं। मानसरोवर में स्नान और पूजा-अर्चना के बाद वे पवित्र जल भी अपने साथ भारत लेकर लौटे। हालांकि उन्होंने बताया कि कैलाश परिक्रमा के दौरान डेरापुक और झुंझुपुई में शौचालयों की संख्या कम है और उनकी स्वच्छता भी बेहतर नहीं है। इसका सबसे ज्यादा असर महिला यात्रियों पर पड़ता है। दंपती ने कहा कि खराब मौसम के कारण भूस्खलन से सड़कें बाधित हुईं, जिससे उन्हें दो दिन अतिरिक्त रुकना पड़ा। लेकिन BRO, भारतीय सेना और अन्य एजेंसियों ने युद्ध स्तर पर काम करते हुए 24 घंटे के भीतर कई स्थानों पर सड़कें बहाल कर दीं, जिसके लिए वे उनके आभारी हैं।
शैलेश सुमन ने कहा कि जीवन में हर सनातनी को कम से कम एक बार कैलाश मानसरोवर की यात्रा जरूर करनी चाहिए। यह भगवान शिव का पवित्र धाम है। साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि कैलाश यात्रा पर विभिन्न राज्यों की ओर से दी जाने वाली सब्सिडी को पूरे देश में एक समान किया जाए, ताकि सभी श्रद्धालुओं को बराबर लाभ मिल सके। चीन से बात कर सुविधाएं बढ़ाए भारत सरकार यात्रियों ने मांग की है कि भारत सरकार इस मुद्दे को चीनी प्रशासन के सामने उठाए, ताकि परिक्रमा मार्ग पर पर्याप्त और स्वच्छ शौचालयों की व्यवस्था हो सके। उनका कहना है कि कैलाश मानसरोवर जैसी विश्वप्रसिद्ध धार्मिक यात्रा में श्रद्धालुओं को बुनियादी सुविधाएं मिलनी चाहिए, ताकि यात्रा और अधिक सुगम व सुरक्षित बन सके। कुल दूरी और ट्रेक- अब कितना आसान हुआ सफर इस बार कैलाश मानसरोवर यात्रा की कुल दूरी 1738 किलोमीटर हो गई है। इसमें लगभग 1690 किलोमीटर यात्रा वाहन से और सिर्फ 38 किलोमीटर पैदल ट्रेक है। साल 2019 से पहले यात्रियों को धारचूला से लिपुलेख दर्रे तक 60 किलोमीटर से ज्यादा पैदल चलना पड़ता था। रास्ते में ऑक्सीजन की कमी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यात्रा काफी चुनौतीपूर्ण होती थी।