Supreme Court: 'गैरेज से चलते लॉ कॉलेजों को मान्यता चिंताजनक'; अदालत 50 वर्षीय CA के केस में BCI से क्या बोली?
सुप्रीम कोर्ट ने काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) की ओर से गैरेज जैसी जगहों से चल रहे कुछ लॉ कॉलेजों को मान्यता देने पर गहरी चिंता
सुप्रीम कोर्ट ने काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) की ओर से गैरेज जैसी जगहों से चल रहे कुछ लॉ कॉलेजों को मान्यता देने पर गहरी चिंता जताई है। कोर्ट ने एक आपराधिक मामला लंबित होने के आधार पर एक लॉ स्नातक को वकील के रूप में पंजीकृत (एनरोल) न करने के काउंसिल के फैसले की भी कड़ी आलोचना की। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस आर महादेवन की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान जब बीसीआई के वकील ने इसे बड़ी चिंता का विषय बताया, तो जस्टिस मेहता ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, वास्तविक बड़ी चिंता यह है कि बीसीआई उन कॉलेजों को मान्यता दे रही है जो गैरेज में चल रहे हैं।
कोर्ट ने यह भी कहा कि काउंसिल पूरे देश में हर तरफ दोषियों को पंजीकृत कर रही है।यह याचिका 50 वर्षीय चार्टर्ड अकाउंटेंट केआर सुदर्शन ने दायर की है, जिन्होंने बाद में कानून (लॉ) की डिग्री हासिल की। तमिलनाडु और पुडुचेरी बार काउंसिल ने उनके खिलाफ एक आपराधिक मामला लंबित होने के कारण वकील के रूप में उनका पंजीकरण करने से इन्कार कर दिया था। सुदर्शन पर आरोप है कि उन्होंने एक ऐसी कंपनी को सलाह दी थी जो वित्तीय अनियमितताओं में शामिल थी।याचिकाकर्ता के वकील निखिल गोयल ने कोर्ट से अंतरिम राहत की मांग करते हुए तर्क दिया कि एडवोकेट्स एक्ट, 1961 की धारा 24ए के तहत सिर्फ मामला लंबित होने के आधार पर किसी को अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता।
उन्होंने यह भी उदाहरण दिया कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के मामले में 31 साल की सजा काट चुके एक दोषी को भी इस साल अप्रैल में वकील के रूप में पंजीकृत किया गया था।गंभीर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट में
तीन जजों की पीठ ने बीसीआई के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि काउंसिल का यह आदेश पूरी तरह से कानून के खिलाफ है। फिलहाल मद्रास हाईकोर्ट ने इस कानूनी मुद्दे को पांच जजों की बड़ी बेंच के पास भेज दिया है।
