23 साल बाद लिया बाप की मौत का बदला: नफरत ने युवक को बना दिया कातिल, क्या है पुणे मर्डर केस की इनसाइड स्टोरी?
मृतक की पहचान 40 वर्षीय संजय बाबूराव कडू-देशमुख के रूप में हुई, जो एक अन्य आपराधिक मामले में जमानत पर बाहर घूम रहा था। पुलिस
मृतक की पहचान 40 वर्षीय संजय बाबूराव कडू-देशमुख के रूप में हुई, जो एक अन्य आपराधिक मामले में जमानत पर बाहर घूम रहा था। पुलिस ने राजगढ़ थाने में हत्या का मुकदमा तो दर्ज कर लिया, लेकिन कत्ल होने के बाद भी कातिल का कोई सुराग नहीं था।पुणे ग्रामीण पुलिस की लोकल क्राइम ब्रांच (एलसीबी) ने जब इस मर्डर मिस्ट्री की तफ्तीश शुरू की, तो मोबाइल टावर डंप डेटा और तकनीकी सबूतों के जाल में दो नाम आकर फंस गए, मंथन वैद्य (24) और सौरभ परदेशी। पुलिस ने 14 जुलाई को इन दोनों को दबोच लिया।थर्ड डिग्री और कड़े इम्तहान के सामने जब आरोपियों ने मुंह खोला, तो एक ऐसी कहानी सामने आई जिसने पुलिस अफसरों की रीढ़ में सिहरन पैदा कर दी।
यह कत्ल सिर्फ चंद दिनों की दुश्मनी का नतीजा नहीं था, बल्कि इसके पीछे 23 साल लंबा खूनी इंतजार छिपा था।साल 2003 में संजय कडू-देशमुख ने एक मामूली विवाद में मंथन वैद्य के पिता दिनेश वैद्य की बेरहमी से हत्या कर दी थी। उस वक्त कातिल मंथन महज 6 महीने का एक बेकसूर बच्चा था।मंथन जैसे-जैसे बड़ा हुआ, उसने अपने पिता का चेहरा तो नहीं देखा था, लेकिन उसके कातिल का नाम उसके सीने में आग की तरह दहकता रहा।संजय कडू-देशमुख जैसे ही एक दूसरे केस में कोर्ट से जमानत पर बाहर आया, मंथन ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर उसे ठिकाने लगाने का चक्रव्यूह रच दिया।पूछताछ में मंथन ने कबूला कि कटराज टनल के पास संजय को घेरकर मारने में उसके साथ सौरभ परदेशी, मीजान शेख और संदीप कोरी भी शामिल थे।सहायक पुलिस निरीक्षक चेतन माचले के मुताबिक, पुलिस ने मंथन समेत सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया है।मंथन वैद्य ने 23 वर्षों तक सिर्फ एक ही ख्वाब देखा था, अपने पिता की मौत का बदला।
पुलिस की मानें तो वह बरसों से संजय की टोह में था। जैसे ही संजय जेल की सलाखों से बाहर कदम रखकर खुली हवा में सांस लेने आया, मंथन ने अपने तीन साथियों के साथ मिलकर पुरानी
कटराज टनल के पास उसे मौत के घाट उतार दिया। अब पुलिस ने इस खूनी थ्रिलर के सभी किरदारों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है और मामले की आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
