सिक्किमः भूस्खलन से निर्माणाधीन सुरंग में फंसे 12 श्रमिक, प्रवेश द्वार मलबे से बंद; गैस रिसाव की आशंका
बचाव अभियान में सबसे बड़ी चुनौती क्या बन रही? सुरंग परियोजना से जुड़ी जानकारी क्या? फिलहाल स्थिति क्या है?
बचाव अभियान में सबसे बड़ी चुनौती क्या बन रही? सुरंग परियोजना से जुड़ी जानकारी क्या? फिलहाल स्थिति क्या है? भूस्खलन के बाद सुरंग के भीतर की स्थिति को लेकर लगातार निगरानी की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, भूमिगत चट्टानों और भूस्तरों में आई हलचल के कारण प्राकृतिक गैस निकलने की आशंका है। इसी वजह से सुरंग के अंदर पहुंचना आसान नहीं है। बचाव अभियान के दौरान कई राहतकर्मियों को चक्कर आने और बेहोश होने की शिकायत हुई, जिसके बाद अभियान को और अधिक सतर्कता के साथ आगे बढ़ाया गया। एहतियात के तौर पर घटनास्थल पर एंबुलेंस भी तैनात की गई हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।घटना के बाद राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), पुलिस तथा अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा की टीमें संयुक्त रूप से राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं।
सुरंग के भीतर गैस की आशंका को देखते हुए विशेष रूप से गैस मास्क से लैस बचावकर्मियों को अंदर भेजा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि बिना सुरक्षा उपायों के सुरंग में प्रवेश करना राहतकर्मियों के लिए भी जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए पहले सुरंग के भीतर गैस की स्थिति का आकलन किया जा रहा है और उसके बाद चरणबद्ध तरीके से श्रमिकों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।अधिकारियों ने बताया कि समरदुंग सुरंग एक राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना का हिस्सा है और यहां निर्माण कार्य जारी था।
सोमवार दोपहर अचानक हुए भूस्खलन से सुरंग का प्रवेश मार्ग पूरी तरह मलबे से भर गया, जिससे अंदर काम कर रहे श्रमिक बाहर नहीं निकल सके। प्रशासन ने फिलहाल किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं की है। बचाव दल का लक्ष्य सुरक्षित तरीके से सुरंग के भीतर पहुंचकर सभी 12 श्रमिकों को बाहर निकालना है।खबर लिखे जाने तक सभी 12 श्रमिक सुरंग के भीतर फंसे हुए हैं और उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए बचाव अभियान लगातार जारी है। प्रशासन का कहना है कि गैस रिसाव की आशंका के कारण हर कदम सावधानी से उठाया जा रहा है ताकि बचावकर्मियों और फंसे श्रमिकों, दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
अधिकारियों ने भरोसा जताया है कि सभी उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल कर जल्द से जल्द श्रमिकों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।
