Lucknow, India

वन नेशन, वन इलेक्शन- JPC की टीम गुजरात पहुंची:प्रियंका गांधी समेत 39 सदस्य सभी पार्टियों के नेताओं से मुलाकात करेंगे

Published 19 May 2026 · politics

वन नेशन, वन इलेक्शन- JPC की टीम गुजरात पहुंची: प्रियंका गांधी समेत 39 सदस्य सभी पार्टियों के नेताओं से मुलाकात करेंगे गांधीनगर वन नेशन-वन इलेक्शन के मुद्दे पर गठित संयुक्त संसदीय समिति ने विभिन्न राज्यों का दौरा कर राजनीतिक दलों और अधिकारियों से परामर्श शुरू कर दिया है। प्रियंका गांधी

वन नेशन, वन इलेक्शन- JPC की टीम गुजरात पहुंची: प्रियंका गांधी समेत 39 सदस्य सभी पार्टियों के नेताओं से मुलाकात करेंगे गांधीनगर वन नेशन-वन इलेक्शन के मुद्दे पर गठित संयुक्त संसदीय समिति ने विभिन्न राज्यों का दौरा कर राजनीतिक दलों और अधिकारियों से परामर्श शुरू कर दिया है। प्रियंका गांधी, संबित पात्रा और बांसुरी स्वराज समेत समिति के 39 सदस्य आज से तीन दिनों के लिए गुजरात पहुंचे हैं। जेपीसी सदस्य मंगलवार की शाम गुजरात सीएम भूपेंद्र पटेल और राज्य के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात कर उनके विचार जानेंगे। समिति की पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस शाम 5:30 बजे गांधीनगर की गिफ्ट सिटी में होगी। वहीं, समिति ने समिति ने 20 मई 2026 को सभी राजनीतिक दलों को अपने विचार रखने के लिए गांधीनगर बुलाया है। इस मुद्दे पर भाजपा के मुख्य प्रवक्ता अनिल पटेल ने कहा- गुजरात भाजपा एक राष्ट्र-एक चुनाव का पूरी तरह से समर्थन करती है। वहीं कांग्रेस प्रवक्ता मनीष दोषी ने कहा- कांग्रेस इस मुद्दे पर अपने विचार रखेगी। यह मुद्दा जनता के अधिकारों से जुड़ा है और हमारी सभी चिंताओं को समिति के समक्ष रखा जाएगा। वन नेशन-वन इलेक्शन के लिए गठित संयुक्त संसदीय समिति की अध्यक्षता वकील पीपी चौधरी कर रहे हैं। इसमें कुल 39 सदस्य हैं, जिनमें 27 लोकसभा सांसद और 12 राज्यसभा सांसद शामिल हैं। वन नेशन वन इलेक्शन के मुद्दे पर 2019 में हुई सर्वदलीय बैठक की तस्वीर।

सपा, टीआरएस, शिरोमणि अकाली दल जैसी पार्टियों ने इसका समर्थन किया था। पिछले साल महाराष्ट्र और उत्तराखंड का दौरा कर चुकी JPC महाराष्ट्र में क्या किया? JPC ने 17-18 मई 2025 को महाराष्ट्र दौरा किया। वहां मुख्यमंत्री, राजनीतिक दलों, प्रशासनिक अधिकारियों, बैंकों, सार्वजनिक उपक्रमों (PSU) और रेगुलेटरी संस्थाओं से बातचीत की गई। समिति का मकसद यह समझना था कि एक साथ चुनाव कराने से प्रशासन, खर्च और शासन पर क्या असर पड़ेगा। उत्तराखंड में क्या किया? JPC 19-21 मई 2025 के बीच देहरादून और उत्तराखंड के दूसरे हिस्सों में गई। समिति ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, राज्य प्रशासन और अन्य संगठनों से चर्चा की। धामी ने JPC से कहा कि बार-बार चुनाव होने से पिछले 3 साल में करीब 175 दिन आचार संहिता के कारण सरकारी काम प्रभावित हुए। उनका दावा था कि अगर लोकसभा और विधानसभा चुनाव साथ हों तो 30-35% तक खर्च बच सकता है। क्योंकि, पहाड़ी राज्यों में बार-बार चुनाव कराना मुश्किल होता है। वहीं, चारधाम यात्रा, बारिश और कठिन भौगोलिक परिस्थितियां चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं। रिपोर्ट/कंसोलिडेटेड सबमिशन कब? JPC को रिपोर्ट 2026 के मानसून सेशन के आखिरी सप्ताह के पहले दिन तक सबमिट करनी है। रिपोर्ट में सभी कंसलटेशंस, प्रेजेंटेशंस और मीटिंग के के इनपुट्स को इकट्ठा करके सिफारिशें दी जाएंगी। अभी कोई फाइनल डेडलाइन या सबमिशन डेट पब्लिश नहीं हुई है। JPC की रिपोर्ट के बाद संसद में आगे चर्चा/वोटिंग होगी।

तस्वीर 23 सितंबर, 2024 की है, जब दिल्ली के जोधपुर ऑफिसर्स हॉस्टल में वन नेशन-वन इलेक्शन के लिए बनाई कमेटी की बैठक हुई थी। एक देश-एक चुनाव क्या है भारत में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के लिए अलग-अलग समय पर चुनाव होते हैं। एक देश-एक चुनाव का मतलब लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने से है। यानी मतदाता लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के सदस्यों को चुनने के लिए एक ही दिन, एक ही समय वोट डालेंगे। आजादी के बाद 1952, 1957, 1962 और 1967 में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ ही हुए थे, लेकिन 1968 और 1969 में कई विधानसभाएं समय से पहले ही भंग कर दी गईं। उसके बाद दिसंबर, 1970 में लोकसभा भी भंग कर दी गई। इस वजह से एक देश-एक चुनाव की परंपरा टूट गई। 'एक राष्ट्र-एक चुनाव' पर विचार करने के लिए पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की अध्यक्षता में 2 सितंबर, 2023 को एक पैनल का गठन किया गया था। इस पैनल ने हितधारकों-विशेषज्ञों के साथ चर्चा और 191 दिनों के शोध के बाद 14 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। एक साथ चुनाव करवाने के 4 बड़े फायदे रामनाथ कोविंद समिति ने अपनी रिपोर्ट में एकसाथ चुनाव करवाए जाने के पक्ष में ये तर्क दिए हैं... 1. शासन में निरंतरता आएगी: देश के विभिन्न भागों में चुनावों के चल रहे चक्रों के कारण राजनीतिक दल, उनके नेता और सरकारों का ध्यान चुनावों पर ही रहता है।

एक साथ चुनाव करवाने से सरकारों का फोकस विकासात्मक गतिविधियों और जनकल्याणकारी नीतियों के क्रियान्वयन पर केंद्रित होगा। 2. अधिकारी काम पर ध्यान दे पाएंगे: चुनाव की वजहों से पुलिस सहित अनेक विभागों के पर्याप्त संख्या में कर्मियों की तैनाती करनी पड़ती है। एकसाथ चुनाव कराए जाने से बार बार तैनाती की जरूरत कम हो जाएगी, जिससे सरकारी अधिकारी अपने मूल दायित्यों पर फोकस कर पाएंगे। 3. पॉलिसी पैरालिसिस रुकेगा: चुनावों के दौरान आदर्श आचार संहिता के क्रियान्वयन से नियमित प्रशासनिक गतिविधियां और विकास कार्य बाधित हो जाते हैं। एक साथ चुनाव कराने से आदर्श आचार संहिता के लंबे समय तक लागू रहने की अवधि कम होगी, जिससे पॉलिसी पैरालिसिस कम होगा। 4. वित्तीय बोझ में कमी आएगी: एकसाथ चुनाव कराने से खर्च में काफी कमी आ सकती है। जब भी चुनाव होते हैं, मैनपॉवर, उपकरणों और सुरक्षा उपायों के प्रबंधन पर भारी खर्च होता है। इसके अलावा राजनीतिक दलों को भी काफी खर्च करना पड़ता है। ये आंकड़े करते हैं एकसाथ चुनावों का समर्थन • 2019-2024 के दौरान भारत में 676 दिन आचार संहिता लागू रही, यानी हर साल करीब 113 दिन। • अकेले 2024 के लोकसभा चुनावों में ही एक अनुमान के मुताबिक करीब 1 लाख करोड़ रुपए खर्च हुए। वन नेशन-वन इलेक्शन से जुड़ी

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