'मुझे बाहर निकाला, अब Bjp-rss समर्थक बता रहे': तस्लीमा का वाम दलों पर निशाना, कोलकाता वापसी पर विवाद क्यों?
निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने पश्चिम बंगाल के वामपंथी नेताओं पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि लगभग 19 वर्षों के अंतराल के बाद कोलकाता
निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने पश्चिम बंगाल के वामपंथी नेताओं पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि लगभग 19 वर्षों के अंतराल के बाद कोलकाता की अपनी आगामी यात्रा से पहले उन्हें भाजपा और आरएसएस का समर्थक करार दिया गया था। तस्लीमा ने साफ किया कि उन्हें एक धर्मनिरपेक्ष संस्था से निमंत्रण मिला है। राज्य प्रशासन की जिम्मेदारी केवल उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने तक सीमित है। उन्होंने एक्स पर लिखा कि उनकी यात्रा का आयोजन धर्मनिरपेक्ष मिशन की ओर से किया गया था, जो एक प्रगतिशील मुस्लिम व्यक्तित्व उस्मान गनी मलिक के नेतृत्व वाला संगठन है। 'क्या पश्चिम बंगाल सरकार मुझे ला रही है?' उन्होंने लिखा, 'क्या भाजपा मुझे कोलकाता ला रही है? नहीं। क्या पश्चिम बंगाल सरकार मुझे ला रही है? नहीं।' उन्होंने आगे कहा, 'पश्चिम बंगाल की निर्वाचित सरकार केवल मेरी यात्रा के लिए सुरक्षा दे रही है। जब भी मैं किसी राज्य की यात्रा करती हूं, चाहे वहां किसी भी राजनीतिक दल का शासन हो, मेरी सुरक्षा सुनिश्चित करना उस राज्य की सरकार की जिम्मेदारी होती है।
यह एक सामान्य प्रशासनिक कर्तव्य है।' वामपंथी नेता क्या दावा कर रहे हैं? वामपंथी गुटों को निशाना बनाते हुए, नसरीन ने बताया कि जिन नेताओं ने पहले उन्हें पश्चिम बंगाल से निष्कासित किया था। वही नेता अब उन पर भाजपा, आरएसएस या हिंदुत्व से जुड़े होने का आरोप लगा रहे हैं। 'उन्होंने मुझे पश्चिम बंगाल से बाहर निकाल दिया था। अब वे दावा करते हैं कि राज्य में कदम रखना मात्र मुझे हिंदुत्व समर्थक, भाजपा समर्थक या आरएसएस समर्थक बना देता है।' अपने केरल दौरा का भी किया जिक्र लेखिका ने वामपंथी नेताओं के बीच जिसे उन्होंने पाखंड करार दिया। उस पर भी प्रकाश डाला और बताया कि उन्होंने सीपीआई (एम) प्रशासन के निमंत्रण पर कई बार केरल का दौरा किया था, जहां उनका जेड + सुरक्षा के साथ गर्मजोशी से स्वागत किया गया था। उन्होंने सवाल किया 'उस समय, क्या कोलकाता के इन वामपंथी नेताओं ने मुझे वामपंथी कहकर गाली दी थी, या उन्होंने मेरी यात्राओं का जश्न मनाया था?' कितने साल बाद नसरीन वापस आई थी?
नसरीन ने सवाल उठाया कि कोलकाता की उनकी संक्षिप्त दो दिवसीय यात्रा ने झूठे प्रचार के अभियान को क्यों जन्म दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वह ठीक 18 साल, आठ महीने और 10 दिन बाद शहर में वापस आ रही हैं। पुस्तक के विमोचन को भी रोक दिया लेखिका ने पश्चिम बंगाल में लगातार आने वाली सरकारों की आलोचना को दोहराते हुए कहा कि वाम मोर्चा सरकार ने उन्हें कोलकाता से बाहर निकाल दिया था। वहीं, उसके बाद की तृणमूल कांग्रेस सरकार ने राज्य में उनके प्रवेश पर रोक लगा दी, उनके ओर से लिखित एक टेलीविजन धारावाहिक का प्रसारण रोक दिया। इसके साथ ही उनकी एक पुस्तक के विमोचन को भी रोक दिया। तस्लीमा ने क्या आरोप लगाए? इसके अलावा, उन्होंने वामपंथी दलों के कुछ वर्गों पर इस्लामी कट्टरपंथियों को खुश करने का आरोप लगाया, जबकि वे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मुस्लिम समुदाय के भीतर आंतरिक सुधार से संबंधित मामलों पर चुप्पी साधे हुए हैं।
