ठेलेवाले का बेटा कैसे बना मुंबई में प्रोडक्शन कंपनी का CEO?
'हालात की आंच पे, जिम्मेदारी के बर्तन में जब उम्र का दूध खौलता है, तब उसमें समझदारी की बहुत मोटी मलाई पड़ती है.' इन लाइनों
'हालात की आंच पे, जिम्मेदारी के बर्तन में जब उम्र का दूध खौलता है, तब उसमें समझदारी की बहुत मोटी मलाई पड़ती है.' इन लाइनों को लिखने वाले ने जिंदगी के तजुर्बों को सिर्फ किताबों में पढ़ा नहीं, बल्कि जिया होगा. जब एक बेहद साधारण और गरीब परिवार का बच्चा अपने हालातों से जूझता है, तो उसके अंदर परिपक्वता समय से पहले आ जाती है.
