संसद का मानसून सत्र आज से:पेपर लीक, राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर हंगामे के आसार; राज्यसभा में अमित शाह वंदेमातरम से जुड़ा बिल पेश करेंगे
संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है। इसकी शुरुआत हंगामेदार होने के आसार हैं। विपक्ष वांगचुक अनशन, NEET-UG पेपर लीक, SIR, महंगाई
संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है। इसकी शुरुआत हंगामेदार होने के आसार हैं। विपक्ष वांगचुक अनशन, NEET-UG पेपर लीक, SIR, महंगाई, राम मंदिर चढ़ावा चोरी जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी कर चुका है। सरकार इस सत्र में 7 बिल ला रही है। शुरुआत लोकसभा में सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने वाले ‘सुप्रीम कोर्ट संशोधन विधेयक’ से करेगी। वहीं, राज्यसभा में अमित शाह संविधान और राष्ट्रगान के अपमान से जुड़ा संशोधन विधेयक रखेंगे। इस सत्र में TMC के बागियों से बनी ‘नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' का भी संसदीय डेब्यू होगा। TMC से भाजपा में आए नए सांसदों का राज्यसभा में शपथ ग्रहण होगा। सत्र शुरू होने से पहले पीएम मोदी संसद भवन के हंसद्वार पर मीडिया को संबोधित करेंगे। 18वीं लोकसभा का 9वां संसदीय सत्र यानी मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलेगा। 25 दिन के सेशन के दौरान लोकसभा-राज्यसभा में कुल 19 बैठकें होंगी। पहले जानते हैं उन 7 बिलों के बारे में, सरकार जिन्हें पेश करेगी चर्चा के लिए समय तय, सबसे ज्यादा वक्त MSME बिल को आज पेश होंगे 2 अहम बिल… राज्यसभा: वंदेमातरम का अपमान अपराध होगा, कानून बना तो सजा और जुर्माना भी मोदी सरकार राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2026 पहले राज्यसभा में पेश करने वाली है। 1971 के अधिनियम के तहत मुख्य रूप से राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रगान, संविधान का अपमान करने पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। इसके तहत राष्ट्रीय सम्मान का अपमान करने पर 3 साल तक की जेल की सजा और जुर्माना हो सकता है।
सरकार ने इसी अधिनियम की धारा 3 में संशोधन किया है। वह राष्ट्रगीत वंदेमातरम को राष्ट्रगान के बराबर का दर्जा दिलाना चाहती है। यानी बिल का मकसद राष्ट्रीय गीत को भी राष्ट्रगान 'जन गण मन' की तरह ही कानूनी सुरक्षा देना है। बिल के प्रावधानों के अनुसार अब वंदेमातरम् गाने में रुकावट डालने, किसी भी तरह से उसका अपमान करने वाले काम को दंडनीय बनाया जाएगा। लोकसभा: सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने वाला बिल ऑर्डिनेंस की जगह लेगा लोकसभा में सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन विधेयक पेश, 2026 पेश किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट में जजों की स्वीकृत संख्या 34 से बढ़ाकर 38 (मुख्य न्यायाधीश सहित) की जाएगी। यह बिल मई में जारी ऑर्डिनेंस की जगह लेगा। ऑर्डिनेंस लागू होने के बाद बढ़ी हुई स्वीकृत संख्या के आधार पर सुप्रीम कोर्ट में 5 नए जज नियुक्त किए जा चुके हैं। इस संशोधन के लिए संविधान में बदलाव की जरूरत नहीं है। इसे पारित करने के लिए संसद में साधारण बहुमत चाहिए। भास्कर नॉलेज: ऑर्डिनेंस क्या होता है जब संसद का सत्र नहीं चल रहा होता, तब सरकार तत्काल कानून बनाने के लिए ऑर्डिनेंस या अध्यादेश जारी कर सकती है। लेकिन संसद का सत्र शुरू होने के बाद उसे 6 सप्ताह (42 दिन) के भीतर दोनों सदनों से पारित कराना जरूरी होता है, अन्यथा ऑर्डिनेंस अपने आप ही समाप्त माना जाता है। TMC के 20 बागी सांसदों को लोकसभा में अलग सीटें मिलीं लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों को नई सीटें अलॉट की हैं ताकि वे अलग बैठ सकें।