NCPI: पश्चिम बंगाल के 20 सांसदों का एनसीपीआई में विलय, पार्टी ने जारी की आधिकारिक लिस्ट
नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) ने पश्चिम बंगाल के 20 सांसदों के पार्टी में विलय को लेकर आधिकारिक सूचना जारी की है। पार्टी ने
नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) ने पश्चिम बंगाल के 20 सांसदों के पार्टी में विलय को लेकर आधिकारिक सूचना जारी की है। पार्टी ने कहा कि विलय स्वीकार किए जाने के बाद ये सभी सांसद अब औपचारिक रूप से एनसीपीआई का हिस्सा बन गए हैं। पार्टी का दावा है कि इन नेताओं के शामिल होने से जनसेवा और राष्ट्र निर्माण के प्रति उसका संकल्प और मजबूत होगा। एनसीपीआई द्वारा जारी सूची में जिन सांसदों के नाम शामिल हैं, उनमें सुदीप बंद्योपाध्याय, डॉ. काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, माला रॉय, मिताली बाग, पार्थ भौमिक, अधिकारी दीपक देव, डॉ. शर्मिला सरकार, सयानी घोष, बापी हलदार, कालीपद सारेन खेरवाल, जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया, प्रसून बनर्जी, अरूप चक्रवर्ती, असित कुमार मल, यूसुफ पठान, जून मालिया, खलीलुर रहमान, मोहम्मद अबू ताहेर खान और रचना बनर्जी शामिल हैं।पार्टी ने अपने बयान में कहा कि इन सभी सांसदों के जुड़ने से संगठन की जनसेवा की भावना को नई मजबूती मिलेगी। साथ ही यह सामूहिक प्रयास देश के विकास और राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण योगदान देगा।बता दें कि नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) एक क्षेत्रीय राजनीतिक दल है, जो जून 2026 में राष्ट्रीय स्तर पर उस समय चर्चा में आया था, जब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 20 बागी सांसदों ने पार्टी में विलय की घोषणा की थी।
इन सांसदों ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के साथ राजनीतिक रूप से जुड़ने के उद्देश्य से एनसीपीआई का दामन थामा था।20 सांसदों के इस विलय को पश्चिम बंगाल की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति में भी एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटनाक्रम का असर आने वाले समय में राज्य और राष्ट्रीय स्तर की राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है।वॉकआउट के बारे में पत्रकारों से बात करते हुए रिजिजू ने कहा, "वह बहिष्कार कुछ समय के लिए था; यह औपचारिक था। मुझे नहीं लगता कि यह बुरा है क्योंकि उन्हें अपनी राय व्यक्त करने का अधिकार है। एनसीपीआई के 20 लोकसभा सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं और लोकसभा अध्यक्ष से नई पार्टी में शामिल होने और संसद में अलग बैठने की मांग की है। यह नियमों के अनुसार है और यह अध्यक्ष के विचाराधीन है।"20 सांसदों के महत्व पर जोर देते हुए केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने कहा, "जब यह मामला अध्यक्ष के विचाराधीन है और 20 सांसद हैं, तो हम उन्हें कैसे वंचित कर सकते हैं? लोकसभा सभी की है तो हम 20 सांसदों को नहीं बुलाएंगे; ऐसा कैसे हो सकता है? उन्हें मान्यता देना या न देना एक प्रक्रिया है। लोकसभा अध्यक्ष के सचिवालय से जो भी होगा, उस पर मैं अभी कोई टिप्पणी नहीं कर रहा हूं।" उन्होंने कहा कि सरकार ने संसद में प्रतिनिधित्व करने वाली सभी पार्टियों को आमंत्रित किया था और एनसीपीआई को कोई विशेष निमंत्रण नहीं भेजा था।उन्होंने कहा, "यह सरकार का कर्तव्य है कि यदि सभी पार्टियां और आम सहमति एक साथ आती हैं, तो हम चाहेंगे, इसलिए हमें सभी को बुलाना होगा।
