मानसून सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक, विपक्ष का वॉकआउट:15 मिनट में बाहर निकले सांसद, बागियों को मीटिंग में बुलाने का विरोध; दोबारा फिर शामिल
मानूसन सत्र से एक दिन पहले सरकार ने रविवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई। बैठक सुबह 11 बजे संसद भवन एनेक्सी के मुख्य समिति कक्ष में
मानूसन सत्र से एक दिन पहले सरकार ने रविवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई। बैठक सुबह 11 बजे संसद भवन एनेक्सी के मुख्य समिति कक्ष में हुई। मीटिंग में कांग्रेस, सपा, टीएमसी, DMK सहित कई विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए। हालांकि 15 मिनट बाद विपक्षी सांसद बाहर आ गए और बैठक का वॉकआउट किया। विपक्षी सांसदों का आरोप है कि सरकार ने TMC के बागी 20 सांसदों के गुट को बैठक में क्यों बुलाया। जबकि स्पीकर ओम बिरला ने उनके गुट को अभी तक मान्यता नहीं दी है। मीटिंग से पहले संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने सभी राजनीतिक दलों से संसद के सुचारु संचालन में सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा- हम सभी राजनीतिक दलों से अपील करते हैं कि संसद के सुचारु संचालन में सहयोग करें। संसद सभी की है, हंगामे से किसी का फायदा नहीं। 25 दिन का मानसून सत्र, 19 बैठकें होंगी; 7 बिल आएंगे संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है। मोदी सरकार इस दौरान 7 बिल पेश करने वाली है। इनमें वंदे मातरम, संविधान और राष्ट्रगान के अपमान से जुड़ा संशोधन विधेयक और सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने वाला बिल शामिल है। 18वीं लोकसभा का 9वां संसदीय सत्र यानी मानसून सत्र 13 अगस्त तक चलेगा। 25 दिन के सेशन के दौरान लोकसभा-राज्यसभा में कुल 19 बैठकें होंगी। सत्र के पहले ही दिन से हंगामा होने के आसार हैं। विपक्ष NEET-UG पेपर लीक, SIR, महंगाई, राम मंदिर चढ़ावा चोरी जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। पहले जानते हैं उन 7 बिलों के बारे में, जो पेश होंगे विपक्ष एथेनॉल और पेपर लीक पर घेरने को तैयार कांग्रेस की संसदीय दल की 16 जुलाई की बैठक के बाद इसके संकेत मिले थे कि पार्टी मोदी सरकार को कई बड़े मुद्दों पर घेरेगी।
पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने गुरुवार को कहा था कि कांग्रेस संसद में चढ़ावा चोरी, पेपर लीक, एथेनॉल मुद्दा, भ्रष्टाचार, महंगाई और विदेश नीति की नाकामियों पर सरकार से जवाब मांगेगी। सरकार परिसीमन बिल ला सकती है, लेकिन कुछ बिल अटके सरकार ने संसद के मानसून सत्र का एजेंडा बता दिया। कुल 7 विधेयकों की सूची में 2 पुराने और 5 नए विधेयक हैं। इनमें 30 दिन जेल में रहे तो PM-CM को हटाने वाला बिल, केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, एक देश-एक चुनाव बिल, परिसीमन और महिला आरक्षण बिल से जुड़े संविधान संशोधन बिल का जिक्र नहीं है। 1. 30 दिन जेल में रहे तो PM-CM को हटाने वाला बिल: मानसून सत्र में आना मुश्किल। वजह- यह अभी संयुक्त संसदीय समिति यानी जेपीसी के पास विचाराधीन है। JPC ने 17 जुलाई को बैठक में अपनी ड्राफ्ट रिपोर्ट टाल दी। JPC ने पांच सिफारिशें दी हैं। समिति की अध्यक्ष बीजेपी सांसद अपराजिता सारंगी का कहना है कि इस पर और चर्चा की जरूरत है। 2. केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक: इस बिल के भी मानसून सत्र में पेश होने की संभावना कम है। वजह- जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी इस पर विचार कर रही है। समिति ने 17 जुलाई को मीटिंग बिल से जुड़े तीन अहम कानूनों पर अपनी ड्राफ्ट रिपोर्ट को मंजूरी देने का फैसला टाल दिया। समिति का कहना है कि संबंधित पक्षों यानी स्टेकहोल्डर्स के साथ और बातचीत की जरूरत है। 3. एक देश-एक चुनाव बिल: इस बिल को भी संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा गया है। अभी कई पक्षों से बातचीत करना बाकी है।