ठाकरे का राम रक्षा आंदोलन: शिंदे बोले- सियासी सुविधा के लिए उद्धव ने ओढ़ा हिंदुत्व का चोला, और क्या-क्या कहा?
पितृधर्म की अनदेखी: भगवान राम ने पिता के वचन के लिए 14 साल का वनवास स्वीकार किया, लेकिन उद्धव ने अपने ही पिता के सिद्धांतों
पितृधर्म की अनदेखी: भगवान राम ने पिता के वचन के लिए 14 साल का वनवास स्वीकार किया, लेकिन उद्धव ने अपने ही पिता के सिद्धांतों को बीच में छोड़ दिया। भगवान राम ने पिता के वचन के लिए 14 साल का वनवास स्वीकार किया, लेकिन उद्धव ने अपने ही पिता के सिद्धांतों को बीच में छोड़ दिया। नैतिक अधिकार खोया: शिंदे के मुताबिक, पिता के आदर्शों को छोड़ने वालों के पास भगवान राम के मूल्यों पर उपदेश देने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। शिंदे के मुताबिक, पिता के आदर्शों को छोड़ने वालों के पास भगवान राम के मूल्यों पर उपदेश देने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। पार्टी बचाने की कोशिश: शिंदे ने दावा किया कि 'राम रक्षा' आंदोलन भगवान राम के लिए नहीं, बल्कि अपनी डूबती राजनीतिक पार्टी को बचाने का एक प्रयास है।
शिंदे ने दावा किया कि 'राम रक्षा' आंदोलन भगवान राम के लिए नहीं, बल्कि अपनी डूबती राजनीतिक पार्टी को बचाने का एक प्रयास है। उद्धव का पलटवार: नागपुर में उद्धव ठाकरे ने कहा था कि मंदिर बन चुका है, अब उसे लुटेरों से बचाने के लिए एक नए आंदोलन की जरूरत है। नागपुर में उद्धव ठाकरे ने कहा था कि मंदिर बन चुका है, अब उसे लुटेरों से बचाने के लिए एक नए आंदोलन की जरूरत है। फडणवीस से सवाल: उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधते हुए पूछा था कि वह मंदिर के 'लुटेरों' के साथ हैं या राम के 'रक्षकों' के साथ। दरअसल, उद्धव ठाकरे ने अयोध्या राम मंदिर के चंदे में कथित घपले को लेकर 'राम रक्षा' आंदोलन शुरू किया है। इसी सिलसिले में शनिवार को उन्होंने नागपुर के एक राम मंदिर में पूजा-आरती की।
वहां एक जनसभा को संबोधित करते हुए उद्धव ने भाजपा और एकनाथ शिंदे पर जमकर निशाना साधा था।शिंदे ने पलटवार करते हुए कहा कि शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा का विरोध करने वालों से उद्धव ने हाथ मिला लिया है। कांग्रेस, राहुल गांधी, सोनिया गांधी और अखिलेश यादव जैसे नेताओं के साथ गठबंधन करके उद्धव ने बहुत पहले ही हिंदुत्व का रास्ता छोड़ दिया था।उपमुख्यमंत्री ने उद्धव ठाकरे को खुली चुनौती दी। उन्होंने कहा कि अगर यूबीटी गुट सच में राम रक्षा आंदोलन चलाना चाहता है, तो सबसे पहले अपने गठबंधन सहयोगियों को बुलाए। राहुल गांधी और अखिलेश यादव को इस आंदोलन में आमंत्रित करे। उसके बाद ही आरएसएस प्रमुख और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को न्योता दे।शिंदे ने याद दिलाया कि बालासाहेब ठाकरे हमेशा 'गर्व से कहो हम हिंदू हैं' का नारा बुलंद करते थे।
वर्षों बाद अब अचानक उद्धव गुट को यह नारा याद आ रहा है। हिंदुत्व कोई राजनीतिक सुविधा की वस्तु नहीं है, जिसे जब चाहा उतार दिया और जब राजनीतिक लाभ दिखा, तब दोबारा पहन लिया। शिंदे ने तंज कसा कि राम रक्षा की बात करने से पहले उद्धव को अपनी पार्टी और अपनी बची-कुची विचारधारा की रक्षा करनी चाहिए।इस पूरे विवाद ने महाराष्ट्र की राजनीति में हिंदुत्व की विरासत की जंग को और तेज कर दिया है। शिंदे गुट खुद को बालासाहेब के विचारों का असली वारिस बता रहा है, जबकि उद्धव खेमा भाजपा और शिंदे गठबंधन को राम मंदिर के नाम पर घेरने की कोशिश में जुटा है। नागपुर की जनसभा से शुरू हुआ यह वाकयुद्ध अब मुंबई तक पूरी तरह गरमा चुका है।
