बंगलूरू में उत्तर प्रदेश का भव्य उत्सव: आध्यात्म, संस्कृति और उत्सव का अद्भुत संगम
उत्तर प्रदेश पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सहयोग से आयोजित यह महोत्सव एक ऐतिहासिक सांस्कृतिक संगम बनने जा रहा है, जहां द आर्ट ऑफ लिविंग का शांत और आध्यात्मिक परिसर उत्तर प्रदेश की विरासत, आध्यात्म, कला और स्वादों के रंगों से जीवंत हो उठेगा। इस विशेष पहल के केंद्र में
उत्तर प्रदेश पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सहयोग से आयोजित यह महोत्सव एक ऐतिहासिक सांस्कृतिक संगम बनने जा रहा है, जहां द आर्ट ऑफ लिविंग का शांत और आध्यात्मिक परिसर उत्तर प्रदेश की विरासत, आध्यात्म, कला और स्वादों के रंगों से जीवंत हो उठेगा। इस विशेष पहल के केंद्र में वह व्यापक दृष्टि है, जिसे वैश्विक आध्यात्मिक गुरु गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर वर्षों से आगे बढ़ाते रहे हैं - ऐसी दृष्टि, जहां संस्कृति, अध्यात्म और समाज क्षेत्रीय सीमाओं से परे जाकर एक सूत्र में जुड़ते हैं।चार दिनों तक आश्रम भक्ति, संगीत और कला के जीवंत उत्सव में परिवर्तित होता दिखाई देगा।
लोक प्रस्तुतियां, शास्त्रीय राग, मनोहारी कथक नृत्य, आध्यात्मिक कथावाचन, हस्तशिल्प बाजारों की रौनक और उत्तर प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों की सुगंध मिलकर ऐसा वातावरण रचेंगी, जो एक ओर भारतीय परंपरा में गहराई से रचा-बसा होगा और दूसरी ओर आधुनिकता की ताजगी से भी भरपूर।महोत्सव में पद्म भूषण से सम्मानित पंडित साजन मिश्रा, प्रसिद्ध लोकगायिका एवं पद्मश्री सम्मानित उर्मिला श्रीवास्तव, डॉ. रुचि खरे और गीतांजलि जी सहित अनेक ख्यातिप्राप्त कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे। संगीत, नृत्य और कथाओं के माध्यम से बनारस, लखनऊ, मथुरा और पूर्वांचल की समृद्ध कलात्मक परंपराओं को जीवंत किया जाएगा।
लोक संस्कृति की मिट्टी से जुड़ी जीवंतता से लेकर हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की गरिमा तक, तथा भगवान श्रीकृष्ण और भगवान श्रीराम की परंपराओं से प्रेरित रास-आधारित प्रस्तुतियां इस महोत्सव की संध्याओं को दृश्यात्मक रूप से भव्य और भावनात्मक रूप से गहन बना देंगी।लेकिन यह अनुभव केवल मंच तक सीमित नहीं रहेगा। आगंतुकों को विशेष रूप से तैयार की गई पर्यटन और आध्यात्मिक प्रदर्शनियों को देखने का अवसर भी मिलेगा, जिनमें अयोध्या, काशी, मथुरा, प्रयागराज, दीपोत्सव और कुंभ मेले की भव्यता को प्रदर्शित किया जाएगा।
इंटरएक्टिव इंस्टॉलेशन और आधुनिक दृश्यात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से उत्तर प्रदेश की पवित्र सांस्कृतिक धरोहर और आध्यात्मिक भूगोल को एक नए, अनुभवात्मक और समकालीन रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।
