क्या सीएम विजय ने राजीव गांधी के हत्यारों का समर्थन किया?: भाजपा ने कांग्रेस पर साधा निशाना, टीवीके ने दी सफाई
इस विवाद की शुरुआत 18 मई को हुई। दरअसल, 18 मई 2009 को श्रीलंका के मुल्लिवैक्काल में श्रीलंकाई सेना की एक बड़ी कार्रवाई में लिट्टे प्रमुख प्रभाकरण की मौत हो गई थी। उनकी पुण्यतिथि के मौके पर मुख्यमंत्री विजय ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक भावुक संदेश लिखा। उन्होंने
इस विवाद की शुरुआत 18 मई को हुई। दरअसल, 18 मई 2009 को श्रीलंका के मुल्लिवैक्काल में श्रीलंकाई सेना की एक बड़ी कार्रवाई में लिट्टे प्रमुख प्रभाकरण की मौत हो गई थी। उनकी पुण्यतिथि के मौके पर मुख्यमंत्री विजय ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक भावुक संदेश लिखा। उन्होंने कहा कि हम मुल्लिवैक्काल की यादों को हमेशा अपने दिल में संजोकर रखेंगे और समुद्र पार रहने वाले अपने तमिल भाइयों के अधिकारों के लिए पूरी तरह से एकजुट रहेंगे। उनके इसी बयान के बाद पूरी सियासत गरमा गई है।इस पोस्ट के सामने आते ही भाजपा ने कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी पर सीधा हमला बोल दिया है।
भाजपा के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने कहा कि तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री ने उस लिट्टे प्रमुख को श्रद्धांजलि दी है, जिसके संगठन ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या की थी। मालवीय ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सत्ता के सुख और हिस्सेदारी के लिए ऐसे गंभीर मुद्दों पर भी पूरी तरह से चुप बैठी है। इसके साथ ही उन्होंने सत्ताधारी गठबंधन और डीएमके पर भी लिट्टे समर्थक होने का गंभीर आरोप लगाया।इस पूरे विवाद के गहराने के बाद मुख्यमंत्री विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) ने अपना बचाव किया है और मामले पर सफाई पेश की है।
टीवीके की तरफ से कहा गया है कि मुख्यमंत्री विजय की यह टिप्पणी केवल प्रभाकरण को लेकर बिल्कुल भी नहीं थी। उन्होंने यह भी साफ किया कि मुख्यमंत्री ने अपने उस संदेश में कहीं भी लिट्टे प्रमुख प्रभाकरण का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया था। पार्टी ने भाजपा के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।टीवीके ने स्पष्ट किया कि 18 मई को श्रीलंका में मारे गए हजारों निर्दोष तमिल नागरिकों को याद किया जाता है। पार्टी ने बताया कि दुनियाभर में बसे श्रीलंकाई तमिल और भारत के कुछ तमिल संगठन 18 मई को हर साल ‘मुल्लिवैक्काल स्मृति दिवस’ या ‘तमिल नरसंहार स्मृति दिवस’ के रूप में मनाते हैं।
मुख्यमंत्री का पोस्ट इसी भयानक नरसंहार में जान गंवाने वाले आम नागरिकों की याद और सम्मान में किया गया था, न कि किसी संगठन के मुखिया के समर्थन में।
