Mumbai: मुंबई कोर्ट का फर्जी आदेश बनाकर दुबई की अदालत में पेश किया, यूएई के दो नागरिकों समेत छह पर केस
पुलिस के मुताबिक, खंडाला निवासी वाहिदा हुसैन शत्ताफ की शिकायत पर यह कार्रवाई की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उनके पति हुसैन
पुलिस के मुताबिक, खंडाला निवासी वाहिदा हुसैन शत्ताफ की शिकायत पर यह कार्रवाई की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उनके पति हुसैन मोहम्मद शत्ताफ की छवि खराब करने और संपत्ति विवाद में उनका दावा कमजोर करने के लिए आरोपियों ने मुंबई की अदालत का एक फर्जी आदेश तैयार किया। बाद में इसी दस्तावेज को दुबई की अदालत में सबूत के तौर पर पेश किया गया। मामले का खुलासा तब हुआ जब शत्ताफ परिवार को दस्तावेज की प्रामाणिकता पर संदेह हुआ।
इसके बाद उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया। हाई कोर्ट के निर्देश पर दस्तावेज की जांच कराई गई।जांच के दौरान मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने अदालत के रिकॉर्ड की पड़ताल की और करीब एक दर्जन लोगों के बयान दर्ज किए। जांच में पता चला कि जिस मुकदमे का उल्लेख फर्जी आदेश में किया गया था, वैसा कोई मामला कभी अदालत में चला ही नहीं था। दस्तावेज को असली दिखाने के लिए अदालत के डिजिटल हस्ताक्षर, सरकारी वकील और नोटरी की फर्जी मुहर तथा नकली हस्ताक्षरों का इस्तेमाल किया गया था।
जांच में यह भी सामने आया कि फर्जी आदेश में हुसैन मोहम्मद शत्ताफ को 25 लाख रुपये की धोखाधड़ी, पासपोर्ट जालसाजी और हवाला कारोबार में दोषी बताया गया था।इतना ही नहीं, उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी होने का भी झूठा दावा किया गया। जबकि वास्तविकता यह थी कि उस समय अदालत में केवल उनके जब्त दोपहिया वाहन को छुड़ाने की अर्जी पर सुनवाई हुई थी। कुर्ला पुलिस ने इस मामले में हुमैद मोहम्मद शत्ताफ और हलीमा सुल्तान अल ओवैस, (दोनों यूएई निवासी) के अलावा मधुकर रविराज विल्सन, केन रिचर्ड विल्सन, रजी अहमद और नोटरी शिवाजी एन.
ढांगे को आरोपी बनाया है। सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज तैयार कर उनका इस्तेमाल करने के आरोप में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
