इस नई व्यवस्था के तहत वाहनों के चलने के दिन तय कर दिए गए हैं। मंगलवार को केवल ऑड यानी विषम अंकों वाले पंजीकरण नंबरों के निजी और सरकारी वाहनों को सड़कों पर उतरने की अनुमति दी गई। वहीं, बुधवार को ईवन यानी सम अंकों वाले पंजीकरण नंबरों के वाहन चलेंगे। यह नियम फिलहाल हिमालयी राज्य के राज्य राजमार्गों पर लागू किया जा रहा है। हालांकि, आम जनता और आपातकालीन सेवाओं को ध्यान में रखते हुए टैक्सियों और दोपहिया वाहनों को इस प्रतिबंध से पूरी तरह छूट दी गई है। मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने घोषणा की है कि सप्ताहांत यानी शनिवार और रविवार को निजी वाहनों पर कोई प्रतिबंध नहीं रहेगा, ताकि आम लोगों को असुविधा न हो।इस मुहिम को प्रभावी बनाने के लिए राज्य सरकार खुद उदाहरण पेश कर रही है। मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग को खुद सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करते और आधिकारिक कार्यक्रमों में पैदल जाते हुए देखा गया है। सरकार के इस रवैये से प्रशासनिक हलकों और जनता में एक सकारात्मक संदेश गया है। कुछ स्थानीय निवासियों ने इसे सतत विकास और सार्वजनिक अनुशासन की दिशा में एक बेहतरीन कदम बताया है। उनका मानना है कि सिक्किम हमेशा से राष्ट्रीय नीतियों को लागू करने में देश के लिए एक मिसाल पेश करता रहा है।इस फैसले को लेकर राज्य के नागरिकों से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। स्थानीय निवासी केशव सपकोटा के अनुसार, सिक्किम की कम आबादी और सीमित वाहन घनत्व के कारण भारत की समग्र ईंधन खपत पर इसका कोई बहुत बड़ा व्यावहारिक असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने राज्य की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों की ओर भी इशारा किया। उनका कहना है कि चुनिंदा शहरी क्षेत्रों को छोड़कर राज्य का अधिकांश हिस्सा बेहद दुर्गम है, जिससे सार्वजनिक परिवहन के अभाव में लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।