केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने शपथ ग्रहण समारोह के दौरान अपने नाम के साथ 'मेनन' शब्द जोड़ने पर अपना बचाव किया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने केवल अपने पिता का नाम लिया था। उनके अनुसार, ऐसे खास मौके पर अपने पिता को याद करने में कुछ भी गलत नहीं है। कैबिनेट बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए सतीशन ने पूछा कि अगर वह अपने पिता का नाम लेते हैं, तो इसमें क्या बुराई है। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने मन ही मन अपनी मां को भी याद किया। अगर वहां मां का नाम लेने की गुंजाइश होती, तो वह उनका नाम भी जरूर लेते। यह विवाद तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया पर उनके पुराने शपथ ग्रहण की तुलना की गई। साल 2021 में विधायक के रूप में शपथ लेते समय उन्होंने खुद को सिर्फ वीडी सतीशन बताया था। लेकिन इस बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते समय उन्होंने अपना पूरा नाम 'वडस्सेरी दामोदर मेनन सतीशन' बोला। इस बदलाव को लेकर सोशल मीडिया और कांग्रेस के कुछ नेताओं ने उनकी आलोचना की। राज्य में जातिगत पहचान और राजनीतिक संदेश को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है।कांग्रेस के कुछ जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री ने केवल अपने नाम का विस्तार किया है। वहीं, कुछ अन्य लोगों का दावा है कि इसके पीछे एक खास संदेश है। उनके अनुसार, यह हिंदू समुदाय तक पहुंचने की एक कोशिश हो सकती है। दरअसल, भाजपा और संघ परिवार कांग्रेस पर मुस्लिम लीग और जमात-ए-इस्लामी के साथ संबंधों को लेकर निशाना साधते रहे हैं। इसके अलावा, नायर सर्विस सोसाइटी (NSS) और एसएनडीपी योगम जैसे बड़े हिंदू संगठन सतीशन को मुख्यमंत्री बनाए जाने के पक्ष में नहीं थे।कांग्रेस के अंदर से भी इस पर विरोध के स्वर उठे हैं। पार्टी नेता जिंटो जॉन और अनूप वीआर ने शपथ के दौरान इस सरनेम के इस्तेमाल की खुलकर आलोचना की है। सतीशन नायर समुदाय से आते हैं और 'मेनन' इसी समुदाय की एक उपजाति है। अब इस मुद्दे ने केरल की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है।