दिल्ली जिमखाना क्लब 5 जून तक खाली करने का ऑर्डर:केंद्र ने 27.3 एकड़ जमीन वापस मांगी; 113 साल पुराना क्लब हाई-सोसायटी स्टेटस का प्रतीक

More Politics & Headlines news · Trending news

Published 5/23/2026, 12:36:19 PM · Updated 5/23/2026, 8:44:43 PMBy TheBriefWire Editorial Team

दिल्ली जिमखाना क्लब 5 जून तक खाली करने का ऑर्डर:केंद्र ने 27.3 एकड़ जमीन वापस मांगी; 113 साल पुराना क्लब हाई-सोसायटी स्टेटस का प्रतीक

Key points

  • दिल्ली जिमखाना क्लब 5 जून तक खाली करने का ऑर्डर: केंद्र ने 27.3 एकड़ जमीन वापस मांगी;
  • 113 साल पुराना क्लब हाई-सोसायटी स्टेटस का प्रतीक नई दिल्ली केंद्र सरकार ने लुटियंस दिल्ली स्थित ऐतिहासिक दिल्ली जिमखाना क्लब को 5 जून तक कैंपस खाली करने का ऑर्डर दिया है।
  • केंद्र के लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस (L&DO) ने 22 मई को क्लब सेक्रेटरी को लेटर भेजकर यह आदेश जारी किया।
  • इसमें कहा गया है कि सरकार को क्लब के कब्जे वाली 27.3 एकड़ जमीन डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने, संस्थागत जरूरतों और दूसरे प्रोजेक्ट्स के लिए चाहिए।
  • आदेश के मुताबिक राष्ट्रपति की ओर से जमीन लीज खत्म कर दी गई है।

Published May 23, 2026.

Quick Summary

दिल्ली जिमखाना क्लब 5 जून तक खाली करने का ऑर्डर: केंद्र ने 27.3 एकड़ जमीन वापस मांगी; 113 साल पुराना क्लब हाई-सोसायटी स्टेटस का प्रतीक नई दिल्ली केंद्र सरकार ने लुटियंस दिल्ली स्थित ऐतिहासिक दिल्ली जिमखाना क्लब को 5 जून तक कैंपस खाली करने का ऑर्डर दिया है। केंद्र के

Why It Matters

This development is important because it may impact public opinion, policy decisions, and future developments related to दिल्ली जिमखाना क्लब 5 जून तक खाली करने का ऑर्डर:केंद्र ने 27.

Key Takeaways

  • दिल्ली जिमखाना क्लब 5 जून तक खाली करने का ऑर्डर: केंद्र ने 27.3 एकड़ जमीन वापस मांगी; 113 साल पुराना क्लब हाई-सोसायटी स्टेटस का प्रतीक नई दिल्ली केंद्र सरकार ने लुटियंस दिल्ली स्थित ऐतिहासिक दिल्ली जिमखाना क्लब को 5 जून तक कैंपस खाली करने का ऑर्डर दिया है।
  • केंद्र के लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस (L&DO) ने 22 मई को क्लब सेक्रेटरी को लेटर भेजकर यह आदेश जारी किया।
  • इसमें कहा गया है कि सरकार को क्लब के कब्जे वाली 27.3 एकड़ जमीन डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने, संस्थागत जरूरतों और दूसरे प्रोजेक्ट्स के लिए चाहिए।
  • आदेश के मुताबिक राष्ट्रपति की ओर से जमीन लीज खत्म कर दी गई है।
  • क्लब के सदस्य सिद्धार्थ ने कहा कि सरकार के आदेश को अदालत में चुनौती दी जाएगी।

दिल्ली जिमखाना क्लब 5 जून तक खाली करने का ऑर्डर: केंद्र ने 27.3 एकड़ जमीन वापस मांगी; 113 साल पुराना क्लब हाई-सोसायटी स्टेटस का प्रतीक नई दिल्ली केंद्र सरकार ने लुटियंस दिल्ली स्थित ऐतिहासिक दिल्ली जिमखाना क्लब को 5 जून तक कैंपस खाली करने का ऑर्डर दिया है। केंद्र के लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस (L&DO) ने 22 मई को क्लब सेक्रेटरी को लेटर भेजकर यह आदेश जारी किया। इसमें कहा गया है कि सरकार को क्लब के कब्जे वाली 27.3 एकड़ जमीन डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने, संस्थागत जरूरतों और दूसरे प्रोजेक्ट्स के लिए चाहिए। आदेश के मुताबिक राष्ट्रपति की ओर से जमीन लीज खत्म कर दी गई है। क्लब के सदस्य सिद्धार्थ ने कहा कि सरकार के आदेश को अदालत में चुनौती दी जाएगी। उन्होंने कहा कि क्लब से किसी सुरक्षा खतरे जैसी स्थिति नहीं है और आदेश में किए गए दावों पर पुनर्विचार होना चाहिए। दिल्ली जिमखाना क्लब की स्थापना ब्रिटिश काल में हुई थी। 1913 में यह इम्पीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब नाम से शुरू हुआ था। आजादी के बाद इसका नाम बदलकर दिल्ली जिमखाना क्लब कर दिया गया। मौजूदा भवन 1930 के दशक में बनाए गए थे।

यह क्लब की मेन बिल्डिंग है। यहीं से अंदर जाने का मेन गेट भी है। PM आवास के पास है क्लब, ब्रिटिश आर्किटेक्ट ने बनाया दिल्ली जिमखाना क्लब को मशहूर ब्रिटिश आर्किटेक्ट रॉबर्ट टोर रसेल ने डिजाइन किया था। उन्होंने ही कनॉट प्लेस और तीन मूर्ति भवन भी डिजाइन किए थे। यह क्लब प्रधानमंत्री आवास लोक कल्याण मार्ग के पास है, जिसके कारण यह इलाका हाई-सिक्योरिटी जोन माना जाता है। क्लब में बैडमिंटन-टेनिस कोर्ट सहित कई सुविधाएं पिछले 113 सालों से यह क्लब हाई-सोसायटी स्टेटस का प्रतीक रहा है। क्लब में 26 ग्रास टेनिस कोर्ट हैं, जो देश के किसी भी क्लब में सबसे ज्यादा बताए जाते हैं। इसके अलावा स्क्वैश कोर्ट, बैडमिंटन कोर्ट, बिलियर्ड्स रूम, स्विमिंग पूल, तीन लाउंज बार और 43 कॉटेज भी हैं। यह क्लब लंबे समय से नौकरशाहों, सेना प्रमुखों, जजों, राजनेताओं, उद्योगपतियों और पुराने कारोबारी परिवारों का पसंदीदा अड्डा रहा है। यहां की सदस्यता को किसी बड़े सरकारी पद जितना प्रतिष्ठित माना जाता है। हर साल सिर्फ 100 लोगों को मिलती है मेंबरशिप करीब 1200 सदस्यों वाले इस क्लब में एंट्री पाना बेहद मुश्किल माना जाता है। सदस्यता के लिए 20 से 30 साल तक इंतजार करना पड़ता था।

हर साल सिर्फ करीब 100 नए लोग ही मेंबरशिप ले पाते हैं। क्लब में दशकों तक 40-40-20 नियम लागू रहा। 40% सदस्यता सिविल सर्विस, 40% रक्षा सेवाओं और बाकी 20% अन्य लोगों को मिलती थी। पहले से क्लब के मेंबर्स के बच्चों को भी प्राथमिकता दी जाती थी। इससे बाहरी लोगों के लिए सदस्य बनना और मुश्किल हो जाता था। सदस्यता से पहले ‘एट होम’ नाम की प्रक्रिया भी होती थी, जहां मौजूदा सदस्य यह तय करते थे कि नया व्यक्ति उनके स्टेटस का है या नहीं। इसी हाई-सोसायटी स्टेटस कल्चर को लेकर क्लब विवादों में भी रहा। दिल्ली जिमखाना बनाम केंद्र सरकार: विवाद की टाइमलाइन 16 मार्च 2016- केंद्र सरकार के कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने क्लब के कामकाज की जांच शुरू कराई। क्लब पर मेंबरशिप में पक्षपात, वित्तीय गड़बड़ियां और नियमों के उल्लंघनों के आरोप लगे। 2020- केंद्र सरकार मामला नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में लेकर गई। सरकार ने कहा कि क्लब अपने मूल उद्देश्य से भटक गया है और वहां पारदर्शिता की कमी है। दिसंबर 2021- NCLT ने क्लब की चुनी हुई मैनेजमेंट कमेटी हटा दी। सरकार की तरफ से एडमिनिस्ट्रेटर नियुक्त किया गया, जिसने क्लब का कंट्रोल संभाला।

2022- सरकार ने ट्रिब्यूनल में कहा कि आम लोगों को सदस्यता नहीं मिल रही है। पुराने सदस्यों के रिश्तेदारों को फायदा दिया जा रहा है और क्लब रसूख लोगों का ग्रुप बन चुका हैट अक्टूबर 2024- नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने केंद्र सरकार के हस्तक्षेप को सही ठहराया। ट्रिब्यूनल ने माना कि क्लब के प्रशासन में गंभीर समस्याएं थीं। ये खबरें भी पढ़ें… प्रधानमंत्री कार्यालय की नई इमारत 'सेवा तीर्थ' का उद्घाटन:PM बोले- नॉर्थ-साउथ ब्लॉक ब्रिटिश हुकूमत का प्रतीक; गुलामी की मानसिकता से निकलना जरूरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 फरवरी को नए पीएम ऑफिस सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन 1 व 2 का उद्घाटन किया। पीएम ऑफिस अब तक साउथ ब्लॉक में था। पीएम मोदी ने कहा कि नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक की इमारतें ब्रिटिश शासन की हुकूमत की प्रतीक थीं। ये भवन ब्रिटेन के महाराज की सोच को गुलाम भारत की जमीन पर उतारने का माध्यम था। हमें गुलामी की इस मानसिकता से बाहर निकलना जरूरी था। पूरी खबर पढ़ें….


📌 Source: Dainik Bhaskar

BriefWire The BriefWire