AI Ceos का पब्लिसिटी स्टंट या 10 साल में खत्म हो सकती है इंसानियत?
कुछ साल पहले तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर कहानी बहुत ज्यादा उलझी हुई नहीं थी. ChatGPT जैसे AI टूल्स आए, लोगों ने सवाल
कुछ साल पहले तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर कहानी बहुत ज्यादा उलझी हुई नहीं थी. ChatGPT जैसे AI टूल्स आए, लोगों ने सवाल पूछने शुरू किए और कुछ ही महीनों में यह साफ हो गया कि AI सिर्फ एक नया टेक टूल नहीं है.
इसके बाद हर बड़ी टेक कंपनी अपनी AI स्ट्रैटेजी लेकर सामने आई. नए मॉडल आए, ज्यादा कंप्यूटिंग लगी, अरबों डॉलर का निवेश हुआ और कंपनियों के बीच ऐसी रेस शुरू हुई जिसमें हर कोई दूसरे से आगे निकलना चाहता था.
उस वक्त सवाल यह नहीं था कि AI की रफ्तार कम होनी चाहिए या नहीं, बल्कि सवाल था कि कौन सबसे तेज आगे निकल सकता
है. अब मामला उल्टा पड़ता दिखाई दे रहा है.
